लॉस एंजेल्स (अमेरिका):
कैलिफोर्निया और व्हाइट हाउस के बीच टकराव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। जहां राज्य सरकार ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ अदालत में मामला दर्ज किया है, वहीं ट्रंप ने राज्य में मरीन और नेशनल गार्ड की भारी तैनाती के आदेश जारी कर दिए हैं।
🛑 प्रदर्शन और सैन्य कार्रवाई
तीन दिनों से लॉस एंजेल्स में इमिग्रेशन और सीमा नीति को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इसके जवाब में ट्रंप प्रशासन ने 2,000 अतिरिक्त नेशनल गार्ड सैनिक और 500 मरीन जवानों को लॉस एंजेल्स भेजा है।
हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि यह तैनाती अनावश्यक और असंवैधानिक है।
⚖️ राज्य बनाम संघीय सरकार
कैलिफोर्निया सरकार ने अदालत में याचिका दायर कर राष्ट्रपति के इन आदेशों को चुनौती दी है, जिसमें मांग की गई है कि लॉस एंजेल्स में संघीय बलों की तैनाती को रोक दिया जाए और असंवैधानिक घोषित किया जाए।
राज्य के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा:
“यह कानून के दायरे से बाहर है और राज्य की स्वायत्तता का उल्लंघन करता है।”
उन्होंने यह भी बताया कि यह 24वां मुकदमा है जो कैलिफोर्निया ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ पिछले कुछ महीनों में दायर किया है।
🎙️ गवर्नर पर ट्रंप की टिप्पणी
इस विवाद के बीच ट्रंप ने एक बयान देकर और सनसनी फैला दी, जिसमें उन्होंने कहा:
“अगर कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसोम को गिरफ्तार कर लिया जाए तो यह बहुत अच्छा होगा।”
जब उनसे यह पूछा गया कि गवर्नर का क्या अपराध है, तो उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा:
“शायद गवर्नर पद के लिए खड़ा होना ही उसका सबसे बड़ा अपराध है, उसने बहुत खराब काम किया है।”
🗨️ गवर्नर और स्थानीय प्रशासन का विरोध
गवर्नर गेविन न्यूसोम ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि उन्हें तैनात सैनिकों की जानकारी मीडिया से मिली, जबकि शहर में उस दिन कोई गंभीर स्थिति नहीं थी।
“पहले भेजे गए 2,000 गार्ड में से केवल 300 सक्रिय हैं। बाकी बिना आदेश के संघीय इमारतों में बैठे हैं। यह किसी भी तरह से सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा नहीं है। यह सिर्फ राष्ट्रपति के राजनीतिक स्टंट का हिस्सा है,” उन्होंने कहा।
🛑 स्थानीय पुलिस भी अनजान
लॉस एंजेल्स पुलिस विभाग के प्रमुख ने जानकारी दी कि शहर को औपचारिक रूप से नहीं बताया गया कि मरीन टुकड़ी कब और कैसे तैनात की जाएगी। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यह निर्णय संघीय स्तर पर लिया गया लेकिन राज्य प्रशासन को जानकारी नहीं दी गई।

