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🌍 ईरान-इजरायल जंग से बढ़ा वैश्विक तनाव, पुतिन-जिनपिंग की आपात वार्ता

putin- xi jinping

क्रेमलिन/बीजिंग:
मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के सातवें दिन वैश्विक स्तर पर चिंता की लहर दौड़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आपातकालीन टेलीफोन वार्ता की, जिसमें दोनों नेताओं ने हालात पर गहन चर्चा की और बल प्रयोग के विरुद्ध साझा रुख जाहिर किया।


📞 क्या बात हुई दोनों नेताओं के बीच?

क्रेमलिन के वरिष्ठ सहयोगी यूरी उशाकोव के अनुसार, पुतिन और जिनपिंग ने इजरायल द्वारा ईरान पर किए जा रहे हमलों की निंदा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि:

“मध्य पूर्व संकट का हल सैन्य रास्ते से नहीं निकल सकता, सिर्फ राजनयिक माध्यम ही इसका समाधान है।”

दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के उल्लंघन को लेकर इजरायल की कार्रवाइयों पर चिंता जताई और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।


🗓️ पुतिन-जिनपिंग की आगामी मुलाकात

इस वार्ता के दौरान पुतिन और शी जिनपिंग के बीच 2 सितंबर को चीन में द्विपक्षीय बैठक आयोजित करने की सहमति बनी। इस बैठक में रूस-चीन रणनीतिक संबंधों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम, G7 समिट के परिणाम और यूक्रेन संकट पर भी चर्चा होगी।


💥 जमीनी स्थिति: इजरायल और ईरान की टकराहट

इजरायली वायुसेना ने गुरुवार को ईरान के अराक भारी जल रिएक्टर को निशाना बनाते हुए सफल हवाई हमला किया। हमले से पहले इजरायल ने रिएक्टर के आसपास के नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी थी। हालांकि ईरानी मीडिया का दावा है कि रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है।

इस हमले के जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों – तेल अवीव, बीर्शेबा, रमत गान और होलोन – पर मिसाइलें दागीं। सबसे अधिक नुकसान तेल अवीव को हुआ, जहां 7 मिसाइलें गिरीं और उच्च-इमारतों और अस्पतालों को निशाना बनाया गया।

ईरानी मीडिया का यह भी दावा है कि इजरायली स्टॉक एक्सचेंज पर भी हमला किया गया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


🚨 दुनिया की चिंता और संभावित मोर्चेबंदी


📌 निष्कर्ष

इस संकट ने वैश्विक स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है। पुतिन और जिनपिंग का संयम बरतने का आह्वान एक सामूहिक वैश्विक प्रयास की शुरुआत हो सकता है, लेकिन इसके प्रभावी होने के लिए सभी पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी होगी।


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