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🔍 चीन की सेना में उथल-पुथल: जिनपिंग की ‘क्लीनअप ड्राइव’ में गायब हो रहे टॉप जनरल

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बीजिंग में एक बार फिर चीनी सेना की ऊपरी परतों में हलचल मच गई है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में जारी सख्त कार्रवाई के चलते कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी या तो लापता हैं या पद से हटा दिए गए हैं।

⚠️ कौन हैं लापता?

सबसे प्रमुख नाम जनरल हे वेइडोंग का है — चीन के सशक्त केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) के सह-उपाध्यक्ष, जो मार्च 2025 से सार्वजनिक रूप से कहीं दिखाई नहीं दिए हैं। वह चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो के सदस्य भी थे, जो देश की सर्वोच्च नीति निर्धारण संस्था मानी जाती है।

🧭 यह सिर्फ एक अधिकारी की बात नहीं…

जनरल हे वेइडोंग की अनुपस्थिति कोई अपवाद नहीं है। इससे पहले विदेश मंत्री किन गांग और पूर्व रक्षा मंत्री ली शांगफू को भी अचानक पद से हटाया गया या गायब बताया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि जिनपिंग के सत्ता मॉडल में ‘वफादारी’ को ‘काबिलियत’ से अधिक तवज्जो दी जा रही है।


🎯 जिनपिंग की रणनीति: शुद्धिकरण या नियंत्रण?

शी जिनपिंग अपने कार्यकाल में लगातार सत्ता के केंद्रीकरण और पार्टी के भीतर शुद्धिकरण (purge) की नीति पर काम करते रहे हैं। उनके कई फैसले चीन की गुटबाजी वाली राजनीति पर रोक लगाने का प्रयास माने जाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह “अंदरूनी सफाई” CCP में अनुशासन और वफादारी को स्थापित करने की कोशिश है। मगर बार-बार होने वाली ये कार्रवाइयाँ, सेना और नौकरशाही में भरोसे और स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।


🧠 क्यों अहम है हे वेइडोंग का मामला?

हे वेइडोंग ने फुजियान प्रांत में जिनपिंग के साथ वर्षों तक काम किया था। उनके नजदीकी माने जाने के बावजूद अगर उन्हें हटाया गया है, तो यह एक संकेत है कि शी किसी को नहीं बख्शते, चाहे वह कितना भी करीबी क्यों न हो।

यह घटनाक्रम CCP के अगस्त में होने वाले महत्वपूर्ण 20वें केंद्रीय सत्र से पहले सामने आया है, जिसमें नेतृत्व संबंधी दिशा तय की जाती है। इससे यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि इन फैसलों के पीछे राजनीतिक संतुलन साधने का प्रयास हो सकता है।


🧩 CCP की आंतरिक राजनीति: एकरूपता के पीछे दरारें

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी भले ही एकदलीय शासन हो, लेकिन इसके भीतर भी गुटबाजी लंबे समय से सक्रिय रही है। पूर्व में यूथ लीग और प्रिंस्लिंग्स जैसे गुटों का बोलबाला था, लेकिन जिनपिंग के युग में इनकी ताकत कम हो गई है।

अब जो गुटबाज़ी बची है, वह निजी वफादारी और क्षेत्रीय कनेक्शन पर आधारित है — जैसे कि फुजियान गुट, जिससे हे वेइडोंग आते हैं। लेकिन यह भी उन्हें बचा नहीं सका।


🧨 सेना पर शिकंजा: सत्ता के लिए या सुरक्षा के लिए?

एक ओर चीन तेज़ी से अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर, भीतर से बार-बार अफसरों की छंटनी यह दर्शाती है कि सेना सिर्फ बाहरी खतरे के लिए नहीं, बल्कि भीतर से संभावित असंतोष को दबाने के लिए भी एक केंद्र बिंदु बन चुकी है।


❓ सबसे बड़ा सवाल: जिनपिंग के बाद क्या?

इन सबके बीच बड़ा प्रश्न यह है कि शी जिनपिंग के बाद नेतृत्व कौन संभालेगा? अब तक किसी उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं हुई है। सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण इस प्रक्रिया को और भी जटिल और अस्थिर बना रहा है।


🔚 निष्कर्ष:

चीन की सेना और सत्तारूढ़ पार्टी में हो रही लगातार अंदरूनी सफाई यह संकेत देती है कि सत्ता का केंद्रीकरण जितना मजबूत हो रहा है, उतनी ही तेज़ी से संदेह, भय और अनिश्चितता की स्थिति भी बन रही है। यह शी जिनपिंग के नेतृत्व की सबसे बड़ी ताकत है—और शायद सबसे बड़ी कमजोरी भी।

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