केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा | 25 जून 2025
आज भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, अमेरिका की कंपनी SpaceX के Falcon 9 Block 5 रॉकेट के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भर रहे हैं। यह मिशन Axiom Space की ओर से आयोजित Axiom-4 (Ax-4) का हिस्सा है।
प्रक्षेपण का समय: दोपहर 12:01 बजे IST
डॉकिंग का अनुमानित समय: 26 जून, शाम 4:30 IST
स्थान: NASA का लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A, फ्लोरिडा
🇮🇳 भारत की ऐतिहासिक उड़ान
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यह दूसरा अवसर है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष में जा रहा है।
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इससे पहले, 1984 में राकेश शर्मा ने सोवियत मिशन के तहत अंतरिक्ष की यात्रा की थी।
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अब 41 वर्षों बाद, शुभांशु शुक्ला एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं – इस बार एक निजी अमेरिकी अंतरिक्ष यान के माध्यम से।
🛰️ फाल्कन 9 ब्लॉक 5: जानिए इस रॉकेट की खासियतें
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Falcon 9 Block 5 एक मध्यम वजन उठाने वाला, दो चरणों वाला रॉकेट है जिसे एलन मस्क की कंपनी SpaceX ने डिज़ाइन किया है।
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इसका पहला चरण पुन: प्रयोग योग्य (reusable) है — यानी यह सुरक्षित तरीके से वापस ज़मीन पर उतर सकता है और फिर से उड़ाया जा सकता है।
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इसकी पहली उड़ान 11 मई 2018 को हुई थी, जिसमें बांग्लादेश का Bangabandhu-1 उपग्रह ले जाया गया था।
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यह रॉकेट मानव उड़ानों के लिए प्रमाणित है — NASA ने इसे 2020 में ह्यूमन-रेटेड सिस्टम के तौर पर मंजूरी दी थी।
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अब तक 16 मानव मिशन पूरे कर चुका है और 100% सुरक्षा रिकॉर्ड रखता है।
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इसमें 9 मुख्य इंजन और 3 बैकअप कंप्यूटर होते हैं। एक इंजन फेल होने पर भी मिशन को पूरा किया जा सकता है।
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जून 2025 तक, Falcon 9 ने 438 लॉन्च किए हैं, जिनमें से 437 सफल रहे — यानी 99.77% सफलता दर।
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यह रॉकेट निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में 22,800 किलोग्राम, पुन: प्रयोग के बाद 18,500 किलोग्राम और GTO जैसी ऊँची कक्षाओं में 8,300 किलोग्राम तक वजन ले जा सकता है।
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इसके Merlin इंजन तरल ऑक्सीजन (LOX) और RP-1 (केरोसीन) पर चलते हैं। साथ ही इसमें हीट शील्ड, टाइटेनियम ग्रिड फिन्स, और लैंडिंग लेग्स जैसी आधुनिक सुविधाएँ होती हैं।
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Falcon 9 ने अब तक नासा के साइंस मिशन, GPS सैटेलाइट, Starlink इंटरनेट सैटेलाइट, क्रू ड्रैगन मिशन, और ISRO के पेलोड भी लॉन्च किए हैं। Axiom-4 मिशन भी इसका हिस्सा है।
✨ निष्कर्ष
Falcon 9 Block 5 सिर्फ एक रॉकेट नहीं, बल्कि आधुनिक अंतरिक्ष युग का प्रतीक बन चुका है। इसकी तकनीकी क्षमताएं, सुरक्षा रिकॉर्ड और पुन: प्रयोग की क्षमता इसे आज की सबसे सफल लॉन्च प्रणाली बनाती है।
आज जब शुभांशु शुक्ला इस रॉकेट में सवार होकर अंतरिक्ष की ओर प्रस्थान कर रहे हैं, तो यह भारत के लिए गौरव का क्षण है — और दुनिया के लिए एक संकेत कि अंतरिक्ष अब केवल महाशक्तियों का क्षेत्र नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल सहयोग और निजी भागीदारी का नया युग शुरू हो चुका है।

