
1 मई से कलेक्ट्रेट कार्यालय में पूरी तरह ई-ऑफिस सिस्टम लागू हो जाएगा। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने टाइम लिमिट बैठक में सभी विभागीय अफसरों को ई-ऑफिस सेटअप तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद फाइलों की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, भूमि विवाद जैसे मामलों की फाइलें जल्दी निपटेंगी और किस अधिकारी के पास फाइल कितनी देर रुकी, इसकी पूरी जानकारी भी रहेगी। हर कार्रवाई की लॉगिंग होगी जिससे भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी।
ई-ऑफिस सिस्टम के फायदे:
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अधिकारी मोबाइल और लैपटॉप से फाइलें देख और निपटा सकेंगे।
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फाइलों को स्कैन कर सिस्टम में अपलोड किया जाएगा।
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फाइलों पर डिजिटल रूप से नोट्स, टिप्पणियां और स्वीकृति दी जा सकेगी।
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फाइलें किस स्तर पर अटकी हैं, इसकी रियल टाइम ट्रैकिंग होगी।
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ऑफिस के भीतर सूचना भेजने और प्रगति की निगरानी के लिए डैशबोर्ड और मेल सिस्टम होगा।
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कार्य प्रणाली कागज रहित और पारदर्शी होगी।
बैठक में दिए गए अन्य निर्देश:
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सभी एसडीएम को अपने क्षेत्र में कोचिंग संस्थान, अस्पताल, होटल और पटाखों की दुकानों का फायर ऑडिट करवाना होगा।
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राजस्व अभियान के तहत फार्मर रजिस्ट्री और आरओआर लिंकिंग का काम जल्द पूरा करना होगा।
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अवैध माइनिंग और अवैध कॉलोनियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश।
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एसडीएम कोर्ट और तहसीलदार कोर्ट का नियमित निरीक्षण।
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50 दिन से ज्यादा लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों की रोजाना समीक्षा।
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जिले की नदियों, तालाबों और जल संरचनाओं के संरक्षण के लिए एक महीने का प्लान तैयार करना।
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कोई भी फाइल अब ऑफलाइन नहीं चलेगी, सिर्फ ई-फाइल ही आगे बढ़ेगी।
भोपाल में कहां-कहां लागू है ई-ऑफिस सिस्टम:
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बिजली कंपनी में पिछले 4 साल से ई-ऑफिस सिस्टम चल रहा है।
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नगर और ग्राम निवेश संचालनालय में ले-आउट अप्रूवल के लिए एआई आधारित सॉफ्टवेयर का उपयोग।
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नगर निगम में भवन अनुज्ञा के लिए ऑनलाइन ई-फाइल सिस्टम, लेकिन हार्डकॉपी भी मांगी जाती है।
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हाउसिंग बोर्ड ने सभी दस्तावेज स्कैन कर ई-ऑफिस सिस्टम लागू किया, अभी शुरुआती चरण में है।
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