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11 को आकृति गिरफ्तार, 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़काई:नोएडा प्रोटेस्ट केस; वकील बोले- पुलिस खाली हाथ, 1 करोड़ ट्रांजेक्शन के सबूत नहीं दिए

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आकृति की गिरफ्तारी पर उठे सवाल, वकीलों ने पुलिस जांच पर खड़े किए गंभीर प्रश्न

बोले- 11 मई को हुई गिरफ्तारी, फिर 13 अप्रैल की हिंसा कैसे भड़काई? करोड़ों के ट्रांजेक्शन के सबूत भी नहीं दिए

नोएडा प्रोटेस्ट और हिंसा मामले में गिरफ्तार की गई आकृति को लेकर अब पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दावा किया कि पुलिस अब तक हिंसा भड़काने से जुड़े ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है।

वकीलों ने अदालत में कहा कि जिस महिला को 11 मई को गिरफ्तार किया गया, उस पर 13 अप्रैल को हुई हिंसा भड़काने का आरोप लगाया जा रहा है। बचाव पक्ष ने इसे जांच में बड़ी विसंगति बताते हुए पुलिस की कहानी पर सवाल खड़े किए।

सुनवाई के दौरान पुलिस पर यह आरोप भी लगाया गया कि उसने कथित 1 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज या बैंकिंग सबूत अदालत के सामने पेश नहीं किए। बचाव पक्ष का कहना है कि केवल आरोपों के आधार पर गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जबकि आर्थिक लेनदेन और फंडिंग के दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद नहीं है।

इस मामले ने अब राजनीतिक और कानूनी बहस को भी तेज कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी लोग गिरफ्तारी की टाइमलाइन और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर्स इसे जांच एजेंसियों की जल्दबाजी बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और डिजिटल व वित्तीय सबूतों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई की गई है और जरूरत पड़ने पर आगे और जानकारी अदालत में पेश की जाएगी।

नोएडा हिंसा मामला अब केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह जांच प्रक्रिया, गिरफ्तारी के आधार और सबूतों की पारदर्शिता को लेकर भी बड़ा सवाल बनता जा रहा है।

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