
बीकानेर के आचार्य पंडित अशोक बिस्सा सन्ना महाराज ने बताया कि शतचंडी महायज्ञ का धार्मिक महत्व बहुत बड़ा है। यह यज्ञ महालक्ष्मी के पूजन से जुड़ा हुआ है और इसे मल मास में सरोवर या नदी के किनारे किया जाता है। इस यज्ञ के दौरान मां जगदम्बा के विभिन्न रूपों का आह्वान कर दुर्गाशप्तशति के पाठ और हवनात्मक यज्ञ किया जाता है।
आचार्य पंडित बिस्सा ने कहा कि 27 से 31 दिसंबर तक शतचंडी महायज्ञ का आयोजन प्रतिवर्ष होता है, और इसे भारतीय लघु पंचांग परिवार, बीकानेर और पोकरण के श्रद्धालुओं के सहयोग से आयोजित किया जाता है।
यज्ञ के पहले दिन सुबह 9 बजे प्रायश्चित कर्म, हिमाद्री संकल्प, स्नान, सरोवर पूजन, और कलश पूजन के बाद सवा 10 बजे कलश यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद मंडप प्रवेश पूजन और हवनात्मक यज्ञ शुरू होगा।
यज्ञ के पांच दिनों में दुर्गाशप्तशति के पाठ और हवनात्मक यज्ञ के दौरान यजमानों की ओर से आहुतियां दी जाएंगी। विशेष रूप से शाम के यज्ञ में ड्राइफ्रूट, पंचमेवे और औषधियों की आहुति दी जाएगी। यज्ञ की पूर्णाहुति 31 दिसंबर को की जाएगी।
