
शहरी इलाकों में थोड़ी राहत
शहर में शनिवार रात करीब 9 बजे तक बिजली बहाल कर दी गई, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में 10 हजार से अधिक घरों में 21 घंटे तक अंधेरा छाया रहा।
कर्मचारियों ने रातभर की मेहनत
बिजली विभाग के कर्मचारी रात 2 बजे तक बिजली सप्लाई चालू करने की कोशिश करते रहे, लेकिन तार टूटने और पोल गिरने जैसी दिक्कतों के चलते रविवार दोपहर 2 बजे जाकर ही बिजली वापस आ सकी।
कहां-क्या नुकसान हुआ?
-
17-18 जगहों पर पेड़ों की शाखाएं बिजली तारों से उलझीं।
-
5 जगह पोल टूटे।
-
3 जगह तार इंसुलेटर से उतरकर उलझ गए।
-
कुछ जगह लाइटनिंग अरेस्टर और इंसुलेटर भी खराब मिले।
-
सोनपुर फीडर में तारों के टूटने से सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई।
मेंटेनेंस की जरूरत
प्री-मानसून में मेंटेनेंस किया गया था, लेकिन अब भी कई जगह पेड़ों की शाखाएं तारों के पास हैं, जिससे खतरा बना हुआ है। बिजली विभाग को मानसून के दौरान भी लगातार मेंटेनेंस करते रहना होगा, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानी न हो और बिजली जल्दी बहाल की जा सके।
👉 निष्कर्ष:
प्राकृतिक आपदा के समय बिजली कर्मचारियों ने जी-जान लगाकर काम किया, लेकिन मेंटेनेंस की कमी के कारण लोगों को घंटों परेशान होना पड़ा। भविष्य में बेहतर व्यवस्था की जरूरत है।
