गाजा युद्ध में लंबे समय से उलझे इजराइल को अब सेना में सैनिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसी चुनौती से निपटने के लिए इजराइली रक्षा बलों (IDF) ने अनिवार्य सैन्य सेवा की अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया है। यह निर्णय गाजा में हमास के खिलाफ चल रही जंग और बढ़ती सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्यों लिया गया ये बड़ा फैसला?
गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से इजराइल को लगातार मानव संसाधन संकट का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 18 महीनों में, सेना न तो हमास के बंधकों को छुड़ा पाई है और न ही हमास को पूरी तरह खत्म कर सकी है। ऐसे में, सैनिकों की संख्या बढ़ाने और रिजर्व बलों पर बोझ कम करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।
क्या बदला है सैन्य सेवा में?
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अब इजराइल के हर नागरिक को तीन साल की सैन्य सेवा करनी होगी।
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अतिरिक्त चार महीनों को रिजर्व ड्यूटी के तहत गिना जाएगा।
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सेना ने सैनिकों की छुट्टियों पर भी रोक लगा दी है ताकि ज्यादा सैनिक ड्यूटी पर बने रहें।
राजनीतिक लड़ाई भी बनी बाधा
पहले भी इजराइली सरकार ने सैन्य सेवा बढ़ाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे अति-रूढ़िवादी राजनीतिक दलों के विरोध का सामना करना पड़ा। ये दल अपने समुदायों के लिए सैन्य सेवा में छूट की मांग करते रहे हैं। अब सुरक्षा हालात को देखते हुए सरकार ने इस योजना को मजबूती से लागू कर दिया है।
हमास के खिलाफ दबाव बढ़ा
IDF का मुख्य उद्देश्य है कि रिजर्व बलों पर निर्भरता कम हो ताकि सैनिकों और उनके परिवारों पर आर्थिक व मानसिक बोझ भी घटे। लंबे समय तक जारी संघर्ष ने इजराइल को यह कठोर निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया है।

