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FBI निदेशक काश पटेल पर काम को लेकर उठे सवाल, डिप्टी डायरेक्टर ने बताई सच्चाई

kash patel

अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई (FBI) के डायरेक्टर काश पटेल बीते कुछ दिनों से एक विवाद के केंद्र में हैं। आरोप यह है कि वह अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं ले रहे और अधिकतर समय नाइट क्लब या खेल आयोजनों में बिताते हैं। हालांकि, अब एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंगिनो ने इन दावों का खंडन किया है और दावा किया कि काश पटेल हर दिन औसतन 13 घंटे तक कार्यालय में काम करते हैं


🕕 सुबह 6 बजे से शुरू होता है दिन

डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंगिनो के मुताबिक, काश पटेल हर सुबह 6 बजे ऑफिस पहुंचते हैं और शाम 7 बजे तक वहीं रहते हैं। बोंगिनो ने यह भी कहा कि उनका और पटेल का ऑफिस एक-दूसरे के बगल में है, इसलिए वे रोजाना उनकी मौजूदगी के गवाह हैं।

उन्होंने बताया, “मैं खुद करीब 7:30 बजे ऑफिस पहुंचता हूं, क्योंकि मैं अपने अपार्टमेंट के जिम में वर्कआउट करता हूं, जबकि काश ऑफिस के जिम का इस्तेमाल करते हैं और इससे पहले ही आ जाते हैं।”


⚠️ क्यों लगे थे आरोप?

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब एफबीआई के एक पूर्व अधिकारी फ्रैंक फिग्लुज़ी ने दावा किया कि काश पटेल को अधिकतर नाइट क्लबों और खेल आयोजनों में देखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पटेल अक्सर लास वेगास स्थित अपने घर से ही काम करते हैं और मीटिंग्स का शेड्यूल भी अपनी सुविधा अनुसार बदलते हैं।

हालांकि, इन दावों को एफबीआई के वर्तमान स्टाफ और डिप्टी डायरेक्टर ने बेबुनियाद और भ्रामक बताया।


👤 कौन हैं काश पटेल?

कश्यप “काश” पटेल को फरवरी 2025 में एफबीआई का निदेशक नियुक्त किया गया था। उनका जन्म 1980 में न्यूयॉर्क में एक गुजराती परिवार में हुआ था। बचपन के कुछ साल उन्होंने पूर्वी अफ्रीका में बिताए थे। उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई गार्डन सिटी हाई स्कूल (लॉन्ग आइलैंड) से पूरी की।

पटेल पहले राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों, रक्षा और खुफिया सेवाओं से जुड़े कई उच्च-स्तरीय पदों पर कार्य कर चुके हैं। उनकी प्रशासनिक शैली को कुछ लोग सख्त और प्रभावशाली बताते हैं।


📌 निष्कर्ष: आरोप या राजनीति?

काश पटेल पर लगे आरोपों और उनके जवाबों को लेकर एफबीआई के भीतर भी हलचल है। हालांकि, डिप्टी डायरेक्टर द्वारा सामने रखे गए तथ्यों से यह साफ होता है कि पटेल पर लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार अब तक सामने नहीं आया है। समय बताएगा कि यह विवाद वास्तविक है या महज राजनीतिक हमला

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