नई दिल्ली:
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में कदम रखने जा रहे हैं और उनके साथ जुड़ी है भारत की नई वैज्ञानिक उड़ान। Axiom Mission-4 (Ax-4) के ज़रिए वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की यात्रा करेंगे, जो किसी भी भारतीय नागरिक द्वारा की गई पहली व्यावसायिक अंतरिक्ष उड़ान होगी। इस ऐतिहासिक मिशन में शुक्ला न केवल अंतरिक्ष में जाएंगे, बल्कि बायो-फार्मिंग से लेकर मसल लॉस तक तीन प्रमुख वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम भी देंगे।
🧪 तीन अहम अंतरिक्ष प्रयोग
1️⃣ खाद्य शैवाल: भविष्य का पोषण
इसरो और ICGEB (नई दिल्ली) के सहयोग से शुभांशु शुक्ला खाने योग्य सूक्ष्म शैवाल (माइक्रोएल्गी) का विकास अंतरिक्ष में करेंगे। ये शैवाल विटामिन और प्रोटीन का समृद्ध स्रोत हैं और भविष्य के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों में पोषण के स्थायी विकल्प बन सकते हैं।
2️⃣ अपशिष्ट से उपयोगी संसाधन
ICGEB द्वारा ही दूसरा प्रयोग अंतरिक्ष में कचरे से पोषक तत्व पैदा करने पर आधारित है। इसमें यूरिया से पोषक तत्व निकालकर शैवालों जैसे स्पिरुलिना और क्रोकोकिडिओप्सिस को उगाया जाएगा — जिससे संसाधनों का पुन: उपयोग संभव होगा।
3️⃣ मांसपेशी क्षय पर रिसर्च
INSTEM (बेंगलुरु) के वैज्ञानिकों के सहयोग से तीसरा प्रयोग मांसपेशियों के घटते स्वास्थ्य और उन्हें बनाए रखने के उपायों पर केंद्रित है। अंतरिक्ष यात्राओं के दौरान तेजी से मसल लॉस होता है और इसका समाधान न केवल स्पेस मिशनों, बल्कि पृथ्वी पर बुज़ुर्गों और बीमार व्यक्तियों के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है।
🧬 स्पेस बायोटेक्नोलॉजी में भारत का बड़ा दांव
विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, भारत अंतरिक्ष जैव-विनिर्माण (Space Bio-manufacturing) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। DBT और ISRO इस दिशा में संयुक्त मिशन चला रहे हैं। भविष्य में कृत्रिम अंगों और ऑर्गेनॉइड्स का निर्माण माइक्रोग्रैविटी में करना एक बड़ा व्यावसायिक अवसर बन सकता है।
🌍 स्पेस इकोनॉमी की ओर अग्रसर भारत
भारत की बायो-इकॉनमी 2014 के 10 अरब डॉलर से 2023 में 151 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। 2030 तक इसे 300 अरब डॉलर और स्पेस इकनॉमी को 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
Axiom-4 के जरिए न केवल भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाई मिलेगी, बल्कि यह मिशन युवाओं को वैज्ञानिक करियर की ओर आकर्षित भी करेगा। यह भारत के अंतरिक्ष भविष्य का वह चरण है, जहां शोध, तकनीक और मानवता का मिलन हो रहा है।

