
न डीजे, न लग्जरी कार
शाम के समय जब बारात शहर की सड़कों से गुजरी, तो लोग हैरान रह गए। न तेज डीजे की आवाज थी, न आतिशबाजी का शोर। दूल्हा पारंपरिक पगड़ी पहनकर रथ पर बैठा था और उसके पीछे 32 बैलगाड़ियां चल रही थीं। इन गाड़ियों को खींचने के लिए 64 बैल लगाए गए थे।
बैलगाड़ियों पर सोफे और शहनाई की धुन
बारातियों की सुविधा के लिए बैलगाड़ियों पर सोफे और गद्दे लगाए गए थे। डीजे की जगह शहनाई और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनें बज रही थीं। लगभग 2 किलोमीटर की यात्रा के बाद बारात विवाह स्थल पर पहुंची। रास्ते में लोग वीडियो बनाते नजर आए और जगह-जगह भीड़ लग गई।
पर्यावरण बचाने का संदेश
इस बारात का विचार दूल्हे के चाचा का था, जो जानवरों से प्रेम करते हैं। उनका कहना था कि आजकल शादियों में गाड़ियों और शोर-शराबे से प्रदूषण बढ़ता है। इसलिए उन्होंने पारंपरिक तरीके से, बिना प्रदूषण वाली बारात निकालने का फैसला किया। उनका उद्देश्य समाज को अच्छा संदेश देना था।
कुछ देर के लिए लगा जाम
एक साथ 32 बैलगाड़ियों के निकलने से मुख्य सड़क पर कुछ देर के लिए ट्रैफिक धीमा हो गया। लेकिन लोगों में नाराजगी कम और उत्साह ज्यादा दिखा। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने ऐसी बारात पहले कभी नहीं देखी।
सोशल मीडिया पर चर्चा
इस अनोखी शादी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोग इसे परंपरा और आधुनिक सोच का सुंदर उदाहरण बता रहे हैं और ‘ग्रीन वेडिंग’ की मिसाल कह रहे हैं।
