क्रिकेट आज तीनों फॉर्मेट – टेस्ट, वनडे और टी20 – में खेला जाता है। हर फॉर्मेट की अपनी अलग मांग होती है। जहां टेस्ट में धैर्य और तकनीक की जरूरत होती है, वहीं टी20 में तेज़ रफ्तार से रन बनाना या बल्लेबाजों को रोकना अहम होता है। यही वजह है कि कई खिलाड़ी टेस्ट और वनडे में तो शानदार प्रदर्शन करते हैं लेकिन टी20 फॉर्मेट में उन्हें मौका नहीं मिल पाता।
आइए जानते हैं 5 ऐसे बड़े खिलाड़ियों के बारे में, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कभी टी20 मैच नहीं खेल पाए।
1. क्रेग ब्रेथवेट (वेस्टइंडीज)
वेस्टइंडीज के ओपनर क्रेग ब्रेथवेट टेस्ट क्रिकेट में बेहद भरोसेमंद बल्लेबाज हैं। उन्होंने अब तक 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं। हालांकि वेस्टइंडीज को टी20 क्रिकेट का बादशाह माना जाता है, फिर भी ब्रेथवेट न तो अंतरराष्ट्रीय टी20 खेल पाए और न ही उन्होंने घरेलू स्तर पर ज्यादा टी20 मैच खेले।
2. दिमुथ करुणारत्ने (श्रीलंका)
श्रीलंका के पूर्व कप्तान दिमुथ करुणारत्ने ने अपने करियर में 100 टेस्ट और 50 वनडे खेले हैं। उनके नाम 8500 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन दर्ज हैं। वह लंबे फॉर्मेट के बेहतरीन खिलाड़ी रहे, लेकिन तेज़ फॉर्मेट यानी टी20 में उन्हें कभी मौका नहीं मिला।
3. अजहर अली (पाकिस्तान)
पाकिस्तान के अजहर अली को टेस्ट में क्लासिक बल्लेबाज माना जाता है। उन्होंने कई यादगार पारियां खेलीं और उनके नाम दोहरा शतक भी है। घरेलू टी20 में उन्होंने करीब 50 मैच खेले, लेकिन औसत प्रदर्शन (985 रन) के कारण उन्हें पाकिस्तान की टी20 टीम में कभी जगह नहीं मिली।
4. चेतेश्वर पुजारा (भारत)
भारत के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को ‘नई दीवार’ कहा जाता है। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 103 मैच खेलकर 7195 रन बनाए हैं। घरेलू टी20 में पुजारा ने शतक भी लगाया, लेकिन उनकी बल्लेबाजी शैली तेज़ फॉर्मेट के हिसाब से फिट नहीं मानी गई। यही वजह है कि उन्हें कभी भारतीय टी20 टीम का हिस्सा बनने का मौका नहीं मिला।
5. नील वैगनर (न्यूजीलैंड)
न्यूजीलैंड के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज नील वैगनर टेस्ट क्रिकेट में अपनी आक्रामक गेंदबाजी के लिए मशहूर रहे। उन्होंने इस फॉर्मेट में 260 विकेट लिए। हालांकि उन्होंने घरेलू टी20 में 100 से ज्यादा विकेट झटके, लेकिन इंटरनेशनल स्तर पर उन्हें केवल टेस्ट में ही मौका मिला। हैरानी की बात यह है कि उन्होंने एक भी वनडे या टी20 मैच नहीं खेला।
इन खिलाड़ियों ने अपने-अपने देशों के लिए लंबी फॉर्मेट में बेहतरीन योगदान दिया, लेकिन टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट का हिस्सा नहीं बन पाए। यह इस बात का सबूत है कि क्रिकेट का हर फॉर्मेट अलग है और उसमें सफल होने के लिए अलग कौशल की जरूरत पड़ती है।

