भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही टेस्ट सीरीज का पांचवां और आखिरी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। लंदन के ओवल मैदान पर खेले गए इस टेस्ट में भारत ने इंग्लैंड को सिर्फ 6 रन से हराकर इतिहास रच दिया। यह टेस्ट इतिहास में भारत की सबसे कम रनों से जीत है। इस जीत के साथ ही एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी 2-2 की बराबरी पर खत्म हुई। पहली पारी में केवल 224 रन बनाने के बाद भारत की वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। आइए जानते हैं वो 5 बड़े कारण, जिनकी वजह से टीम इंडिया यह मुकाबला जीत पाई।
1. मोहम्मद सिराज की कप्तानी जैसी गेंदबाजी – पांचवें टेस्ट में भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह नहीं खेले, ऐसे में मोहम्मद सिराज ने पूरे पेस अटैक की कमान संभाली। उन्होंने मैच में कुल 9 विकेट झटके और जबरदस्त नियंत्रण और आत्मविश्वास के साथ गेंदबाजी की। सिराज की बॉडी लैंग्वेज इतनी मजबूत थी कि उससे बाकी गेंदबाजों—प्रसिद्ध कृष्णा और आकाशदीप—को भी आत्मविश्वास मिला।
2. बल्लेबाजी में गहराई आई काम – भारत की पहली पारी में 6 विकेट सिर्फ 153 रन पर गिर चुके थे, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने 71 अहम रन जोड़े और स्कोर 224 तक पहुंचाया। दूसरी पारी में वाशिंगटन सुंदर ने मुश्किल समय में शानदार 53 रन बनाए, जिससे भारत का स्कोर 396 तक पहुंच पाया। अगर सुंदर यह पारी नहीं खेलते, तो इंग्लैंड को 30-40 रन कम का टारगेट मिलता और नतीजा कुछ और हो सकता था।
3. गेंदबाजी में मिला भरपूर साथ – अक्सर भारत के तेज गेंदबाजों में मुख्य गेंदबाज अकेले दम पर विकेट लेते हैं, लेकिन इस टेस्ट में ऐसा नहीं हुआ। सिराज के साथ प्रसिद्ध कृष्णा ने भी शानदार गेंदबाजी की और 8 विकेट झटके। दोनों ने एक-दूसरे को अच्छा सपोर्ट किया और इंग्लैंड के बल्लेबाजों को टिकने नहीं दिया।
4. पुरानी गेंद से मिली जीत की चाबी – पांचवें दिन इंग्लैंड को जीत के लिए सिर्फ 35 रन चाहिए थे और भारत के पास नई गेंद लेने का विकल्प था। लेकिन कप्तान शुभमन गिल और टीम मैनेजमेंट ने फैसला किया कि वे पुरानी गेंद से ही खेलेंगे। पुरानी गेंद स्विंग हो रही थी और उससे इंग्लिश बल्लेबाज लगातार परेशान हो रहे थे। अगर नई गेंद ली जाती, तो वह बल्ले पर ज्यादा अच्छी तरह आती और इंग्लैंड आसानी से रन बना सकता था।
5. जायसवाल का शतक बना टर्निंग पॉइंट – यशस्वी जायसवाल ने इस सीरीज में लगातार 6 पारियों में फ्लॉप होने के बाद आखिरकार ओवल टेस्ट में शानदार वापसी की। उन्होंने दूसरी पारी में धैर्य और क्लास के साथ 118 रन बनाए। यह पारी भारत के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने टीम को 396 के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
कप्तान शुभमन गिल की रणनीति और संयम ने इस मुकाबले में अहम भूमिका निभाई। खासकर पांचवें दिन नई गेंद न लेने का फैसला उनकी सूझबूझ को दिखाता है। इस जीत ने साबित कर दिया कि भारतीय टेस्ट टीम बदलाव के दौर से गुजर रही है, लेकिन उसके जज्बे में कोई कमी नहीं है।

