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AI Deepfakes पर लगाम कसने के लिए डेनमार्क देगा नागरिकों को अपने चेहरे और आवाज़ पर कॉपीराइट अधिकार

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कोपेनहेगन:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए जा रहे फर्जी वीडियो और तस्वीरों (Deepfakes) पर लगाम लगाने के लिए डेनमार्क एक नया कानून लाने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित कानून के तहत डेनिश नागरिकों को अपने शरीर, चेहरे और आवाज़ पर कॉपीराइट अधिकार दिए जाएंगे।

यह बदलाव डेनमार्क के कॉपीराइट कानून में संशोधन के जरिए लाया जाएगा, जिसका उद्देश्य AI तकनीक के ज़रिए लोगों की पहचान से जुड़ी चीज़ों के दुरुपयोग को रोकना है। डेनमार्क के संस्कृति मंत्रालय ने बताया कि इस प्रस्ताव को सभी प्रमुख दलों का समर्थन मिल चुका है और जल्द ही इसे संसद में पेश किया जाएगा।

“अपनी पहचान पर हर व्यक्ति का अधिकार है”: संस्कृति मंत्री

डेनमार्क के संस्कृति मंत्री, जैकब एंगल-श्मिट ने कहा:

“हम स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि हर व्यक्ति को अपने शरीर, चेहरे और आवाज़ पर अधिकार है। मौजूदा कानून, जनरेटिव AI के दुरुपयोग से नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर पा रहा।”

उन्होंने आगे कहा:

“इंसानों को डिजिटल कॉपी मशीन में डालकर मनमानी तरह से इस्तेमाल किया जा रहा है — और मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगा।”

क्या होगा असर?

यदि प्रस्ताव पास हो जाता है, तो डेनमार्क के नागरिक उन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से बिना सहमति शेयर किए गए कंटेंट को हटाने की मांग कर सकेंगे, जिसमें उनकी छवि, आवाज़ या चेहरा गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया हो।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कानून व्यंग्य और पैरोडी जैसे कंटेंट पर लागू नहीं होगा, जो अभी भी अनुमत रहेंगे।


न्यूज़ीलैंड में भी गूंजा AI Deepfake का मामला

हाल ही में न्यूज़ीलैंड की सांसद लॉरा मैकक्लर ने संसद में अपनी एक AI-जेनरेटेड नग्न तस्वीर दिखाकर इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि यह फर्जी तस्वीर मात्र 5 मिनट में ऑनलाइन तैयार की जा सकती है।

“समस्या तकनीक की नहीं है, बल्कि इसके दुरुपयोग की है,” उन्होंने इंस्टाग्राम पर लिखा।
“कानूनों को अब तकनीक के साथ कदम मिलाकर चलना होगा।”

मैकक्लर अब न्यूज़ीलैंड के कानून में बदलाव लाकर यह सुनिश्चित करना चाहती हैं कि बिना सहमति किसी भी प्रकार की नग्न या फर्जी छवि साझा करना गैरकानूनी माना जाए — चाहे वह Deepfake ही क्यों न हो।

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