
कौन हैं मरीज?
मरीज का नाम मुनमुन है, जो पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर की रहने वाली हैं। जुलाई 2024 में जब वे एम्स दिल्ली पहुंचीं, तब उनका पेट बहुत ज्यादा फूला हुआ था। करीब 25 साल पहले उनका एक ऑपरेशन हुआ था, जिसमें एक ओवरी और एक फेलोपियन ट्यूब निकाली गई थी। जांच में पता चला कि उन्हें कोलन कैंसर है, जो पेट के कई अंगों तक फैल चुका था।
पहले इलाज से नहीं मिला फायदा
मुनमुन ने इससे पहले कई बड़े अस्पतालों में इलाज कराया और कीमोथेरेपी के कई चक्र भी लिए, लेकिन बीमारी बढ़ती ही गई। स्कैन में दिखा कि पूरा पेट ट्यूमर से भरा है और अलग-अलग अंग पहचानना भी मुश्किल हो गया था। इस कारण इस केस को ऑपरेशन के लायक नहीं माना जा रहा था।
दो चरणों में हुआ बेहद जोखिम भरा ऑपरेशन
एम्स में सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. एम.डी. रे और उनकी टीम ने हिम्मत दिखाई और ऑपरेशन करने का फैसला लिया। ऑपरेशन दो चरणों में किया गया। पहले चरण में ट्यूमर का बड़ा हिस्सा निकाला गया। इसके लिए कोलन, छोटी आंत का हिस्सा, गर्भाशय, दोनों फेलोपियन ट्यूब, ओमेंटम, लिवर का कुछ भाग और पेट की झिल्ली हटानी पड़ी। ऑपरेशन बहुत जोखिम भरा था और ज्यादा खून बहने का खतरा था।
HIPEC तकनीक से खत्म की गई बची हुई कैंसर कोशिकाएं
दो दिन बाद दूसरे चरण में HIPEC तकनीक से गरम कीमोथेरेपी सीधे पेट के अंदर दी गई। इसका उद्देश्य उन कैंसर कोशिकाओं को खत्म करना था जो आंखों से दिखाई नहीं देतीं। यह प्रक्रिया करीब डेढ़ घंटे तक चली।
तेजी से हुई रिकवरी
ऑपरेशन के बाद मुनमुन को ICU में रखा गया, लेकिन अगले ही दिन उनकी हालत में सुधार दिखने लगा। पांच दिन के अंदर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के मुताबिक, अब पेट में कोई दिखाई देने वाला ट्यूमर नहीं है।
डॉक्टरों की सलाह
प्रो. एम.डी. रे ने कहा कि स्टेज-4 या फैला हुआ कोलन कैंसर भी हर बार लाइलाज नहीं होता। सही जांच, सही समय और अनुभवी डॉक्टरों के इलाज से गंभीर मामलों में भी उम्मीद रहती है। उन्होंने बताया कि कोलन कैंसर बढ़ने के पीछे गलत खान-पान, तंबाकू, शराब, मोटापा, तनाव और खराब जीवनशैली बड़ी वजह हैं।
