भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) हमेशा बड़े फैसलों को लेकर चर्चा में रहता है। हाल ही में यह मुद्दा सामने आया कि कुछ दिग्गज खिलाड़ियों को उनके करियर के आखिरी दौर में फेयरवेल टेस्ट मैच खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया। क्रिकेट फैंस और एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सब बोर्ड की अंदरूनी राजनीति और अलग-अलग प्लानिंग का नतीजा था।
मई 2025 में टीम इंडिया के दो बड़े खिलाड़ियों ने कुछ ही दिनों के अंतराल में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया था। लेकिन हैरानी की बात ये रही कि दोनों में से किसी भी खिलाड़ी को फेयरवेल टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला। यही वजह थी कि फैंस और क्रिकेट जगत में सवाल उठे कि आखिर ऐसा क्यों हुआ?
इस मुद्दे पर भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने भी अपनी राय रखी थी। उन्होंने कहा था— रिटायरमेंट का फैसला पूरी तरह से खिलाड़ी का निजी फैसला होता है।
लेकिन अगर कोई क्रिकेटर 8-10 साल से लगातार टीम इंडिया के लिए खेल रहा है या उसने 40-50 से ज्यादा टेस्ट मैच खेले हैं, तो उसे एक आखिरी मैच का मौका जरूर मिलना चाहिए। इस मैच के जरिए खिलाड़ी फील्ड पर ही अपने करियर को अलविदा कह सके, यह उनके लिए बड़ी बात होती है।
पुजारा ने साफ कहा कि बोर्ड इसमें क्या कर सकता है, इस पर वह ज्यादा कुछ नहीं कह सकते। लेकिन इतना ज़रूर है कि जिसने भी भारतीय टीम को अपना समय और योगदान दिया है, उसे फेयरवेल मैच का सम्मान मिलना चाहिए।
विराट कोहली ने अब तक कुल 123 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने 46.85 की औसत से 9230 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 30 शतक और 31 अर्धशतक निकले। रोहित शर्मा ने 67 टेस्ट मैचों में 4301 रन बनाए। टेस्ट करियर में उन्होंने भी कई यादगार पारियां खेलीं और भारत को अहम जीत दिलाई।
स्पष्ट है कि फेयरवेल न मिलने से खिलाड़ियों के फैंस ही नहीं बल्कि कई पूर्व क्रिकेटर्स भी नाराज़ हैं। अब देखना ये होगा कि आगे BCCI अपने इस रवैये में बदलाव करता है या नहीं। खिलाड़ियों को सम्मान के साथ विदाई देना सिर्फ परंपरा ही नहीं बल्कि उनके योगदान को याद रखने का एक शानदार तरीका भी है.

