

दिल्ली की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के एक फैसले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने सीधा निशाना साधा है। मामला दिल्ली सरकार के एक आदेश से जुड़ा है, जिसमें कहा गया है कि मंत्री और विधायक जिलाधिकारी (DM), ADM या SDM को बिना मुख्य सचिव की अनुमति के किसी बैठक या निरीक्षण में शामिल नहीं कर सकते।

🔹 AAP ने लगाया गंभीर आरोप
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह आदेश लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने कहा,
“जब विधायक जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं तो क्या उन्हें अधिकारियों से बात करने का भी अधिकार नहीं होना चाहिए?”
सौरभ ने आरोप लगाया कि इस आदेश से साफ है कि दिल्ली सरकार के भीतर विश्वास की कमी और आपसी तालमेल में गड़बड़ी है। उन्होंने कहा,
“सीएम चाहतीं तो मंत्रियों से सीधे बात कर सकती थीं, लेकिन यह आदेश दिखाता है कि सरकार के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।”
🔸 मनीष सिसोदिया ने भी जताई नाराज़गी
दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर कहा,
“अब मंत्री अपनी ही सरकार के अफसरों को न बैठक में बुला सकते हैं, न फील्ड निरीक्षण में ले जा सकते हैं। सब कुछ मुख्य सचिव की अनुमति से होगा।”
उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र का मज़ाक बना दिया है।
🔹 सीएम रेखा गुप्ता ने AAP पर किया पलटवार
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AAP पर पलटवार करते हुए कहा कि AAP खुद भ्रष्टाचार में डूबी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
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“जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना” में 142 करोड़ रुपये के फर्जी बिल पास किए गए, जबकि योजना का बजट सिर्फ 15 करोड़ था।
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कई संस्थानों के दस्तावेज फर्जी पाए गए।
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दलित बच्चों के नाम पर भ्रष्टाचार किया गया।
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बिना दस्तावेज़ और बिना हस्ताक्षर के फॉर्म जमा कर कोचिंग के नाम पर पैसा उठाया गया।
उन्होंने कहा कि अब इस मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) करेगी और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।
🔸 सीएम का बड़ा आरोप
रेखा गुप्ता ने कहा,
“AAP ने बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर राजनीति की, लेकिन असल में दलित बच्चों का हक छीना। अब AAP को हर पैसे का हिसाब देना होगा।”
🔚 निष्कर्ष:
दिल्ली सरकार के एक आदेश को लेकर CM रेखा गुप्ता और AAP के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
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AAP इसे मंत्रियों की शक्तियां छीनने का प्रयास बता रही है।
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जबकि सीएम रेखा गुप्ता ने AAP पर बड़े स्तर के भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर पूरे मामले को पलट दिया है।
अब देखना ये है कि इस सियासी टकराव का असर आने वाले दिनों में दिल्ली की राजनीति पर क्या पड़ता है।
