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GMLR परियोजना: ठेकेदार पर 50 लाख का जुर्माना, 31 मई 2026 तक फ्लाईओवर खोलने का लक्ष्य

मुंबई में गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) परियोजना में देरी होने पर बीएमसी ने सख्ती दिखाई है। दिंडोशी कोर्ट से दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी तक बन रहे फ्लाईओवर के काम में सुस्ती के कारण ठेकेदार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अतिरिक्त नगर आयुक्त अभिजीत बांगर ने साइट का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि काम तय समय के अनुसार नहीं हो रहा है, जिससे परियोजना में देरी हो रही है।


क्या है GMLR परियोजना?

यह परियोजना गोरेगांव के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को मुलुंड के ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे से जोड़ेगी। इसकी कुल लंबाई करीब 12.2 किलोमीटर है। इसमें 4.7 किमी लंबी दो भूमिगत सुरंगें भी बनाई जा रही हैं।

इसका उद्देश्य पश्चिमी और पूर्वी उपनगरों के बीच ट्रैफिक कम करना और सफर को तेज और सुरक्षित बनाना है।


पहले चरण का 75% काम पूरा

फ्लाईओवर के कुल 31 खंभे बन चुके हैं। 30 में से 20 स्पैन का काम पूरा हो गया है। कुल मिलाकर लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

अब बीम लगाने, डेक स्लैब डालने और पहुंच मार्ग बनाने का काम बाकी है। बीएमसी ने लक्ष्य रखा है कि 31 मई 2026 तक फ्लाईओवर को यातायात के लिए खोल दिया जाए। इसके लिए साइट पर मजदूर और मशीनें बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।


बाधाएं हटाने के निर्देश

फ्लाईओवर के पास जल निकाय, सीवेज लाइन और ट्रांसफार्मर जैसी बाधाएं हैं। इन्हें जल्द हटाने या स्थानांतरित करने के आदेश दिए गए हैं ताकि काम में और देरी न हो।


सुरंग का काम भी जारी

चित्रनगरी क्षेत्र में बनने वाली दोहरी सुरंग (ट्विन टनल) का काम भी तेजी से चल रहा है। इसके लिए आधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल होगा। खुदाई का पहला चरण पूरा हो चुका है और अब भारी क्रेनों की मदद से आगे का काम शुरू किया जा रहा है।


75 मिनट का सफर होगा 25 मिनट में

अभी गोरेगांव से मुलुंड जाने में 75 से 90 मिनट लगते हैं। GMLR बनने के बाद यह सफर करीब 25 मिनट में पूरा हो सकेगा। इससे समय, ईंधन और प्रदूषण में भी कमी आएगी।


14,000 करोड़ की बड़ी परियोजना

करीब 14,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह परियोजना चार चरणों में पूरी होगी। लक्ष्य है कि 2028 तक पूरा प्रोजेक्ट तैयार हो जाए और मुंबई को बेहतर पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी मिले।

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