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Iran-Israel Conflict: इजरायल ने ईरान की न्यूक्लियर साइट पर बरसाईं मिसाइलें, नतांज़ और फोर्डो को हुआ भारी नुकसान

nuclear plant

तेहरान/यरूशलम – ईरान और इजरायल के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष ने अब एक निर्णायक मोड़ ले लिया है। शनिवार देर रात, इजरायल ने ईरान के नतांज़ न्यूक्लियर फैसिलिटी पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया, जिससे इलाके में भारी तबाही मच गई। नतांज़, तेहरान से लगभग 220 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है और ईरान के सबसे संवेदनशील परमाणु स्थलों में गिना जाता है।

सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा – साइट्स को भारी क्षति

मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा जारी की गई हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजेस में देखा जा सकता है कि हमला कितना विनाशकारी था। पहले और बाद की तस्वीरों से साफ होता है कि ईरान की कई प्रमुख परमाणु सुविधाएं — विशेष रूप से नतांज़, फोर्डो, और इस्फ़हान — को निशाना बनाया गया है। इन ठिकानों पर यूरेनियम संवर्धन का कार्य होता था।

इजरायल का बयान – “परमाणु खतरे को खत्म करने की कार्रवाई”

इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने सोशल मीडिया पर एक बयान में कहा,

“ईरानी शासन की परमाणु हथियार परियोजना को निशाना बनाते हुए इजरायल ने मिसाइल हमले किए। टारगेट्स में शामिल थे – ईरानी रक्षा मंत्रालय का मुख्यालय, एसपीएनडी परियोजना स्थल, और वे स्थान जहां परमाणु भंडारण छिपाया गया था।”

इजरायल ने इस अभियान को “ऑपरेशन राइजिंग लायन” नाम दिया है और इसे देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया है।

ईरान की प्रतिक्रिया और IAEA की रिपोर्ट

ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि इजरायल का आरोप है कि यह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) ने पुष्टि की है कि इजरायली हमलों में नतांज़ और फोर्डो जैसे संवेदनशील स्थल भी प्रभावित हुए हैं।

इजरायल के शहरों पर भी मिसाइल हमले

सिर्फ ईरान ही नहीं, इजरायल के शहर भी निशाने पर हैं। रविवार सुबह, यरुशलम और तेल अवीव में हवाई हमले के सायरन गूंजे और जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इजरायल डिफेंस फोर्स के अनुसार, देशभर में लाखों नागरिकों ने हमले की चेतावनी मिलने पर बंकरों में शरण ली।


निष्कर्ष:

ईरान-इजरायल संघर्ष अब केवल सीमित सैन्य कार्रवाई नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। दोनों देशों के कदमों पर अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें और अधिक गहराई से टिकी हैं।

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