भारतीय वायुसेना के स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर LCH प्रचंड को लेकर चीन में बेचैनी का माहौल है। खास बात यह है कि यह हेलीकॉप्टर अभी पूरी तरह तैनात भी नहीं हुआ है, लेकिन इसके संभावित प्रभाव को लेकर चीन की सैन्य मीडिया में चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। भारत द्वारा 156 LCH हेलीकॉप्टरों का ऑर्डर मंजूर होने के बाद से ही चीन की चिंताएं बढ़ गई हैं।
उच्च ऊंचाई पर जबर्दस्त ताकत, प्रचंड से डर क्यों?
मार्च 2025 में भारतीय रक्षा मंत्रालय ने लगभग 7.3 अरब डॉलर की लागत से 156 LCH प्रचंड हेलीकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी। यह हेलीकॉप्टर विशेष रूप से 5,000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर ऑपरेशन करने की क्षमता रखता है—एक ऐसा इलाका जहां भारत की चीन और पाकिस्तान दोनों से सैन्य तनातनी बनी रहती है। यही कारण है कि चीन इस नए कदम को हल्के में नहीं ले पा रहा।
चीनी मीडिया में घबराहट साफ
हाल ही में एक चीनी डिफेंस मैगजीन ने दावा किया कि प्रचंड, उनके J-10 अटैक हेलीकॉप्टर के मुकाबले कमजोर साबित हो सकता है। हालांकि, इस तरह की बयानबाज़ी यह दिखाने के लिए काफी है कि चीन भारतीय वायुसेना की क्षमताओं पर पैनी नजर रख रहा है और LCH की तैनाती से पहले ही दबाव में है।
स्वदेशी ताकत से चीन को झटका
प्रचंड भारत का पहला घरेलू रूप से विकसित लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किया है। यह हेलीकॉप्टर ‘मेक इन इंडिया’ पहल का बड़ा उदाहरण बन चुका है। इसका उद्देश्य टैंक विरोधी ऑपरेशन, क्लोज एयर सपोर्ट और हाई-एल्टीट्यूड मिशनों में भारत को मजबूती देना है।
तकनीकी खूबियां जो प्रचंड को खास बनाती हैं
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डुअल सीट डिज़ाइन और दो टर्बोशाफ्ट इंजन
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ग्लास कॉकपिट, नाइट विजन और डिजिटल एवियोनिक्स
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20 मिमी की तोप और चार हार्ड पॉइंट्स जिन पर मिसाइलें, रॉकेट और बम लगाए जा सकते हैं
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हथियारों का संचालन हेलमेट-माउंटेड टारगेटिंग सिस्टम से
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विशेष डिज़ाइन जो ऊंचाई और मौसम की मार झेलने में सक्षम
2028 से शुरू होगी आपूर्ति
पहले बैच में 2022 में भारतीय वायुसेना को 10 और सेना को 5 हेलीकॉप्टर मिल चुके हैं। नया ऑर्डर 2028 से 2033 के बीच पूरा किया जाएगा, जिससे भारत की उच्च हिमालयी सीमा पर आक्रामक सैन्य क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
निष्कर्ष: अभी शुरुआत है, लेकिन असर गहरा
भले ही LCH प्रचंड ने अभी पूर्ण ऑपरेशनल सेवा नहीं शुरू की है, लेकिन इसकी उपस्थिति भर से ही चीन में रणनीतिक हलचल शुरू हो गई है। यह साबित करता है कि स्वदेशी तकनीक, अगर सही दिशा में विकसित हो, तो वो केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव भी बना सकती है।

