
राज्य की राजनीति में एक बार फिर शरद पवार और अजित पवार के एक साथ आने की चर्चा ज़ोरों पर है। इस बीच बारामती के मालेगांव शुगर फैक्ट्री चुनाव ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।
क्या है मामला?
22 जून को मालेगांव सहकारी चीनी कारखाना का चुनाव होना है। यह चुनाव सिर्फ एक सहकारी संस्था का चुनाव नहीं, बल्कि पवार परिवार की राजनीतिक दिशा का संकेत माना जा रहा है। बारामती, पवार परिवार का गढ़ है, इसलिए यहां के फैसलों का राज्य की राजनीति पर गहरा असर होता है।
शरद पवार गुट ने रखी शर्त
शरद पवार के गुट ने 21 सीटों में से 6 सीटें अजित पवार से मांगी हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि अजित पवार कितनी सीटें उन्हें देंगे।
आज नामांकन वापसी की आखिरी तारीख है, इसलिए दोपहर तक तय हो जाएगा कि पवार परिवार एक साथ चुनाव लड़ेगा या नहीं।
क्या दोनों गुट होंगे एकजुट?
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अगर दोनों गुट मिलकर चुनाव लड़ते हैं तो यह संकेत होगा कि शरद और अजित पवार फिर साथ आ रहे हैं।
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हालांकि, अजित पवार गुट के दो सीनियर नेता इस एकता के खिलाफ बताए जा रहे हैं।
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अगर दोनों गुट मिल जाते हैं तो सुप्रिया सुले को केंद्र सरकार में मंत्री पद मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
निष्कर्ष:
आज दोपहर तक यह तय हो जाएगा कि NCP एक होगी या नहीं। मालेगांव का यह चुनाव सिर्फ एक फैक्ट्री चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक समीकरणों को बदलने वाला माना जा रहा है।
