
क्यों जारी हुआ नोटिस
एनजीटी ने चिंता जताई है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई इलाके अति-दोहित और संकटग्रस्त हैं। ऐसे में भूजल रिचार्ज के लिए ठोस कदम जरूरी हैं। एनजीटी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 24 सितंबर 2025 के आदेश का पालन अनिवार्य है।
यदि तय समय में शपथ पत्र दाखिल नहीं किए गए, तो संबंधित अधिकारियों को 19 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली सुनवाई में पेश होना होगा।
क्या है पूरा मामला
बीकानेर निवासी ताहिर हुसैन की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शिव कुमार सिंह ने बताया कि
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प्रदेश के 160 रीको औद्योगिक क्षेत्रों में
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460 ट्यूबवेल से
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रोजाना 6.90 करोड़ लीटर से ज्यादा भूजल
बिना अनुमति निकाला जा रहा है।
एनजीटी ने साफ कहा कि केंद्रीय भूजल प्राधिकरण की अनुमति के बिना औद्योगिक क्षेत्रों और कर्मचारियों के घरेलू उपयोग के लिए पानी देना नियमों का उल्लंघन है।
सरकार को हुआ भारी नुकसान
साल 2017 में बिना अनुमति के घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन दिए गए। इस पर स्थानीय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई नहीं की।
इससे सरकार को करीब 1400 करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व नुकसान हुआ।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
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साल 2024 में एनजीटी ने रीको पर 275 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई
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इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2025 को कड़ा आदेश देते हुए कहा कि अनुमति के बिना जल आपूर्ति नहीं हो सकती
किन जिलों के कलेक्टरों को देना होगा शपथ पत्र
राजस्थान के ये 17 जिले शामिल हैं—
अलवर, बीकानेर, बाड़मेर, सीकर, उदयपुर, भीलवाड़ा, चूरू, सिरोही, श्रीगंगानगर, जालोर, झुंझुनूं, कोटा, जयपुर, पाली, सवाई माधोपुर, करौली और राजसमंद।
निष्कर्ष
एनजीटी ने साफ संकेत दे दिया है कि भूजल के अवैध दोहन पर अब ढील नहीं दी जाएगी। कागजों में नहीं, जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखानी होगी, वरना जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
