
राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना (RGHS) के तहत अब निजी अस्पतालों में दवाइयों पर सख्त निगरानी रखी जा रही है। सरकार के नए नियम के अनुसार, निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीजों को एक बार में 2000 रुपए से ज्यादा की दवाइयां नहीं दी जा रही हैं। इस कारण जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बार-बार अस्पताल जाना पड़ रहा है।
क्या है मामला?
आरजीएचएस योजना के तहत पहले मरीजों को एक बार में 3000 से 5000 रुपए तक की दवाइयां मिल जाती थीं। लेकिन अब नियम बदलने के बाद, अस्पताल मरीजों को 2000 रुपए तक की ही दवा दे रहे हैं। कुछ अस्पतालों ने एसएसओ आईडी लॉक होने का हवाला दिया, लेकिन जांच में इसकी पुष्टि नहीं हुई।
अस्पतालों में स्थिति
पंचशील इलाके के एक निजी अस्पताल में डिस्चार्ज हुए मरीजों को भी दवा 2000 रुपए की सीमा में ही दी जा रही है। पत्रिका संवाददाता ने जब अस्पताल के प्रभारी और फार्मासिस्ट से अलग-अलग जानकारी ली, तो उन्होंने आईडी लॉक की बात से इनकार किया।
रजिस्ट्रेशन में भी दिक्कत
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में एक सेवानिवृत्त डॉक्टर को दवा के लिए एक घंटे तक रजिस्ट्रेशन काउंटर पर इंतजार करना पड़ा, लेकिन नेटवर्क खराब होने के कारण उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया और उन्हें दवा लिए बिना लौटना पड़ा।
सरकार का आदेश
अब निजी अस्पतालों में आरजीएचएस योजना के तहत मरीजों को एक बार में सिर्फ 2000 रुपए तक की ही दवा दी जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के तहत लिया गया है।
– डॉ. ज्योत्सना रंगा, सीएमएचओ अजमेर
