
मोहन भागवत के मुताबिक, राम मंदिर के लिए जो आंदोलन चला, उसमें RSS ने आगे बढ़कर भूमिका निभाई। जिसने भी इस आंदोलन का साथ दिया, उसे जनता का समर्थन मिला। उन्होंने कहा कि आज भाजपा जिन “अच्छे दिनों” की बात कर रही है, उसके पीछे भी RSS का योगदान है।
भागवत का यह बयान ऐसे समय आया है, जब 2024 के चुनावों के दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के एक पुराने बयान को लेकर चर्चा हुई थी। उस बयान में कहा गया था कि भाजपा RSS के बिना भी चुनाव जीत सकती है। इससे संघ के कई कार्यकर्ता नाराज हुए थे।
भाजपा और RSS का रिश्ता कितना जरूरी?
मोहन भागवत के बयान से यह साफ होता है कि भाजपा के लिए RSS आज भी बहुत मायने रखता है। माना जा रहा है कि यह बात उन्होंने संघ कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए कही है। साथ ही यह भाजपा नेतृत्व के लिए भी एक संकेत है कि पार्टी का विस्तार जरूर हुआ है, लेकिन उसकी जड़ें अब भी RSS से जुड़ी हुई हैं।
RSS और भाजपा के रिश्तों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। लेकिन भागवत के इस बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि दोनों के बीच का संबंध आज भी मजबूत और अहम है।
