
मां बनीं सहारा
मनु ने बताया कि उनकी मां ने उन्हें कभी कमजोर महसूस नहीं होने दिया। मां ही उनकी आंखों की रोशनी बन गईं और हर कदम पर उनका साथ दिया।
बिना ब्रेल लिपि के की पढ़ाई
मनु को ब्रेल लिपि नहीं आती, लेकिन उन्होंने तकनीक का सही उपयोग करते हुए UPSC की तैयारी की। वे ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे जो पढ़ाई की सामग्री उन्हें सुनाकर समझाते थे। इसी तकनीक की मदद से उन्होंने परीक्षा की तैयारी की।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
पहले प्रयास में असफल रहने के बावजूद मनु ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बताया कि जब वे चार साल के थे, तभी पहली बार “IAS” शब्द सुना था और तभी से ठान लिया था कि एक दिन UPSC पास करूंगा।
घंटों की नहीं टॉपिक की गिनती की
मनु कहते हैं कि उन्होंने कभी पढ़ाई के घंटे नहीं गिने। जब तक कोई टॉपिक पूरी तरह से समझ नहीं आ जाता, तब तक पढ़ते रहते। चाहे रात के दो क्यों न बज जाएं।
अभी JNU से कर रहे हैं पीएचडी
मनु वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से पीएचडी कर रहे हैं। उनका सपना है कि IAS बनकर समाज की सेवा करें और खुद को भी बेहतर इंसान बना सकें।
मनु की कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किलें चाहे जितनी भी हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है।
