इंटरनेशनल न्यूज़ | ‘गोल्ड कार्ड वीजा’ पर ठंडी प्रतिक्रिया, ट्रम्प का दावा पड़ा फीका
वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की बहुचर्चित “गोल्ड कार्ड वीजा” योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई है। जिस स्कीम को बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने के तौर पर पेश किया गया था, वह अब तक फ्लॉप साबित होती दिख रही है।
📉 दावे बड़े, हकीकत छोटी
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- ट्रम्प समर्थित इस योजना के तहत 1300 आवेदन बेचे जाने का दावा किया गया था
- लेकिन वास्तविकता में अब तक सिर्फ 1 व्यक्ति ने ही वीजा लिया
इस भारी अंतर ने योजना की विश्वसनीयता और प्रभाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
💡 क्या था ‘गोल्ड कार्ड वीजा’?
“गोल्ड कार्ड वीजा” को एक प्रीमियम रेजिडेंसी प्रोग्राम के रूप में पेश किया गया था, जिसमें:
- भारी निवेश के बदले अमेरिका में रहने/काम करने की अनुमति
- तेज़ प्रोसेसिंग और विशेष सुविधाओं का वादा
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि शर्तें और लागत इतनी ज्यादा थीं कि आम निवेशकों की दिलचस्पी कम रही।
🧠 एक्सपर्ट्स की राय
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार:
- योजना की उच्च लागत और सख्त शर्तें बड़ी बाधा बनीं
- वैश्विक निवेशक पहले से मौजूद वीजा विकल्पों को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं
- राजनीतिक अनिश्चितता ने भी भरोसा कम किया
🌍 अमेरिका की इमेज पर असर?
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी योजनाओं के असफल होने से अमेरिका की निवेश आकर्षण नीति पर सवाल उठ सकते हैं, हालांकि इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।
📌 निष्कर्ष
Donald Trump की “गोल्ड कार्ड वीजा” योजना फिलहाल उम्मीदों से काफी पीछे है। बड़े दावों के बावजूद ज़मीनी हकीकत अलग नजर आ रही है, जिससे यह साफ है कि केवल आकर्षक नाम और वादों से निवेशकों को लुभाना आसान नहीं।

