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Waqf Bill: सुप्रीम कोर्ट में ओवैसी की याचिका का विरोध, वकील डॉ. सचिन ने दाखिल की हस्तक्षेप याचिका – जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में चल रही वक्फ बिल पर सुनवाई के दौरान वकील डॉ. सचिन अशोक काले ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की मूल याचिका का विरोध किया है और कहा कि यह मामला सिर्फ मुस्लिम अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी अल्पसंख्यकों को अधिकार मिलना चाहिए।

क्या है मामला?

डॉ. सचिन ने कोर्ट में कहा कि अगर वक्फ बोर्ड को धार्मिक अधिकारों के तहत विशेष दर्जा दिया जा रहा है, तो अन्य अल्पसंख्यक समुदायों (जैसे भाषाई अल्पसंख्यक) को भी अपने बोर्ड बनाने और चलाने की आज़ादी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान में सभी के अधिकार बराबर हैं और अनुच्छेद 14 व 15 के तहत किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

कोर्ट की टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना ने कहा कि अनुच्छेद 26 एक धर्मनिरपेक्ष प्रावधान है, जो सभी धर्मों पर लागू होता है। उन्होंने साफ किया कि धार्मिक प्रथाओं और प्रशासनिक अधिकारों को एक जैसा नहीं समझा जाना चाहिए।

आज फिर सुनवाई, पर रोक नहीं

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस कानून पर अभी कोई रोक नहीं लगाई जा रही है। अगली सुनवाई के लिए कल दोपहर 2 बजे का समय तय किया गया है।

क्या है याचिकाकर्ता और विरोध करने वालों की राय?

  • ओवैसी और उनके साथियों का कहना है कि चूंकि वक्फ बोर्ड मुस्लिम समाज से जुड़ा है, इसलिए सरकार को इसमें हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।

  • वहीं, डॉ. सचिन का कहना है कि वक्फ बोर्ड धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि एक प्रबंधन संस्था है, इसलिए इसे विशेष धार्मिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।

निष्कर्ष

डॉ. सचिन की याचिका का मकसद यह है कि अगर किसी एक समुदाय को अधिकार मिल रहे हैं, तो बाकी अल्पसंख्यक समुदायों को भी समान अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 से जोड़ते हुए सभी के लिए बराबरी की मांग की है।

सुनवाई जारी है, अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला देता है।

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