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अनिल अंबानी की कंपनी ने रचा इतिहास: भारत की पहली निजी रक्षा अपग्रेड कंपनी बनी, 5000 करोड़ का निवेश करेगी

नई दिल्ली: अनिल अंबानी की रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भारत के रक्षा क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। यह कंपनी भारत की पहली निजी फर्म बन गई है जो बिना किसी विदेशी मदद या मूल निर्माता (OEM) के खुद ही सेना के विमानों को अपग्रेड कर रही है। अब तक यह काम सिर्फ सरकारी कंपनियां या विदेशी कंपनियां करती थीं।


डॉर्नियर-228 विमान का अपग्रेड सफल

  • रिलायंस ने अब तक 55 डॉर्नियर-228 विमानों को सफलतापूर्वक अपग्रेड किया है।

  • यह प्रोजेक्ट HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) के साथ कॉन्ट्रैक्ट में किया गया।

  • इसमें अमेरिका की Genesys Avionics कंपनी तकनीकी भागीदार रही।

  • पहले 37 विमानों का कॉन्ट्रैक्ट मिला था, फिर 18 और विमानों का ऑर्डर मिला।

  • इस प्रोजेक्ट की कुल कीमत 350 करोड़ रुपये है।


अब 5000 करोड़ के नए टारगेट पर नजर

  • कंपनी अब अगले 7 से 10 साल में 5000 करोड़ रुपये के अपग्रेड प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहती है।

  • भारत में हजारों पुराने फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर हैं जिन्हें अपग्रेड करना जरूरी है।

  • इनके जीवनकाल को बढ़ाने और तकनीकी रूप से आधुनिक बनाने के लिए अपग्रेड जरूरी है।


क्यों है अपग्रेड मार्केट इतना बड़ा?

  • किसी भी फाइटर जेट या हेलीकॉप्टर की मेंटेनेंस और अपग्रेड पर उसका 200-300% खर्च हो सकता है।

  • दुनियाभर में अपग्रेड मार्केट 5 लाख करोड़ से ज्यादा का है और जल्द ही 7 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।


आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

  • यह पूरी योजना प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के तहत लाई गई है।

  • कंपनी अब हेलीकॉप्टर और अन्य सैन्य प्लेटफॉर्म्स को भी अपग्रेड करने की योजना बना रही है।

  • इसके लिए वो दुनियाभर की रक्षा कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही है।


राफेल फाइटर जेट में भी भागीदारी

  • रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में राफेल जेट्स के PBL (परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स) प्रोग्राम में भी शामिल है।

  • इसमें कंपनी फ्रांस की Thales कंपनी के साथ मिलकर काम कर रही है।


निवेशकों के लिए सुनहरा मौका

  • यह प्रोजेक्ट ना सिर्फ तकनीकी रूप से शानदार है बल्कि लंबे समय तक कमाई देने वाला भी है।

  • इससे रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेशकों के लिए एक बेहतर अवसर बन सकती है।

  • भारत के रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी का यह एक मजबूत उदाहरण है।


निष्कर्ष:

रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर का यह कदम भारत के रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी ताकत को बढ़ावा देगा और देश को विदेशी कंपनियों पर कम निर्भर बनाएगा। यह भारतीय डिफेंस सेक्टर में एक नया युग शुरू करने जैसा है।

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