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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कोयला आधारित उद्योगों पर सख्ती करने की तैयारी शुरू हो गई है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अलवर, भिवाड़ी, नीमराणा और टपूकड़ा के उद्योगों को कोयले की जगह स्वच्छ और वैकल्पिक ईंधन अपनाने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उद्योगों और संबंधित लोगों से इस विषय पर सुझाव भी मांगे गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अलवर-भिवाड़ी क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि कोयला इस्तेमाल करने वाली इकाइयों को धीरे-धीरे स्वच्छ ईंधन की ओर जाना होगा, ताकि एनसीआर की हवा की गुणवत्ता बेहतर हो सके। इसके लिए उद्योगों को प्राकृतिक गैस (सीएनजी, एलएनजी, आरएलएनजी), बायोगैस, अक्षय ऊर्जा और बिजली जैसे विकल्प अपनाने के लिए कहा गया है।
यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एम.सी. मेहता बनाम केंद्र सरकार मामले में दिए गए आदेशों के आधार पर जारी किए गए हैं। मंडल ने बताया कि यह एक सामान्य सूचना है। अगर किसी उद्योग को इस संबंध में कोई आपत्ति है, तो वह तय समय सीमा के भीतर न्यायालय में अपनी बात रख सकता है।
उद्योगों को बदलाव के लिए मिलेगा समय
कोयला आधारित उद्योगों को नए ईंधन पर जाने के लिए कुछ समय दिया जाएगा, ताकि वे अपने बॉयलर और मशीनों को गैस या बिजली से चलने वाली प्रणाली में बदल सकें। हालांकि उद्योगपतियों का कहना है कि अभी क्षेत्र में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता सीमित है। गैस पाइपलाइन और सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं होने से उद्योगों को लागत बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने की चिंता है।
प्रदूषण कम करने पर सरकार का फोकस
भिवाड़ी-नीमराणा औद्योगिक क्षेत्र लंबे समय से वायु प्रदूषण के कारण चर्चा में रहा है। एनसीआर के शहरों में लगातार खराब होती हवा को देखते हुए सरकार अब कोयले जैसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन का इस्तेमाल कम करना चाहती है। इसी दिशा में उद्योगों को स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए कहा गया है।
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