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नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कटारा हत्याकांड के दोषी विकास यादव की मां के इलाज को लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि दोनों सरकारें समय पर मेडिकल बोर्ड नहीं बना सकीं, इसलिए अब एम्स (AIIMS) दिल्ली को मेडिकल बोर्ड बनाकर 21 अप्रैल तक रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
क्या है मामला?
विकास यादव ने कोर्ट में अंतरिम ज़मानत की अर्जी दी थी, ताकि वो अपनी बीमार मां की देखभाल कर सके। उनका कहना था कि मां ICU में भर्ती हैं और सर्जरी से इनकार कर चुकी हैं, इसलिए उनका साथ रहना जरूरी है।
कोर्ट की नाराजगी क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार को मेडिकल बोर्ड बनाने के निर्देश दिए थे ताकि यह तय किया जा सके कि ज़मानत जरूरी है या नहीं।
लेकिन:
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यूपी सरकार ने 7 दिन और
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दिल्ली सरकार ने 10 दिन
का समय लिया बोर्ड बनाने में।
जब तक बोर्ड अस्पताल पहुंचा, विकास की मां डिस्चार्ज हो चुकी थीं। हालांकि बाद में उन्हें दोबारा भर्ती किया गया।
अब एम्स को आदेश
कोर्ट ने कहा कि दोनों राज्यों के काम करने का तरीका संतोषजनक नहीं है, इसलिए अब एम्स दिल्ली को तुरंत मेडिकल बोर्ड बनाकर विकास यादव की मां की सेहत पर रिपोर्ट तैयार करने का आदेश दिया है।
क्या है नीतीश कटारा हत्याकांड?
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फरवरी 2002 में नीतीश कटारा की हत्या कर दी गई थी।
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हत्या का कारण था कि नीतीश और विकास यादव की बहन भारती के बीच प्रेम संबंध थे, जिससे यादव परिवार नाराज़ था।
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2016 में सुप्रीम कोर्ट ने विकास यादव और उनके चचेरे भाई विशाल यादव को 25-25 साल की सजा सुनाई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट और यूपी सरकार पर भी फटकार
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बच्चा तस्करी के मामलों में लापरवाही के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार को भी फटकारा।
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कोर्ट ने कहा कि इन मामलों की सुनवाई 6 महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए।
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साथ ही निर्देश दिया कि अगर किसी अस्पताल से बच्चा चोरी हुआ तो उसका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कहा कि अगर इन आदेशों का पालन नहीं हुआ तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
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