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गोंडा।
प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत गोंडा जिले की 53 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। इस उपलब्धि पर डीएम नेहा शर्मा और सीडीओ अंकिता जैन ने ग्राम प्रधानों को स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।
टीबी मुक्त अभियान की प्रमुख बातें:
✔ जिले में कुल 6125 सक्रिय टीबी मरीजों का इलाज चल रहा है।
✔ वर्ष 2023 में जिले की 17 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई थीं।
✔ वर्ष 2024 में 59 ग्राम पंचायतों ने आवेदन किया, लेकिन जांच के बाद 53 पंचायतों को योग्य पाया गया।
✔ 9 पंचायतें लगातार दो साल (2023 और 2024) से टीबी मुक्त घोषित हुईं।
✔ 9 ग्राम पंचायतों को महात्मा गांधी की रजत मूर्ति और 44 ग्राम पंचायतों को कांस्य मूर्ति व प्रमाण पत्र दिए गए।
टीबी मुक्त होने के लिए जरूरी मापदंड:
🔹 हर 1000 लोगों में कम से कम 30 की जांच होनी चाहिए।
🔹 ग्राम में एक से अधिक मरीज नहीं होने चाहिए।
🔹 सभी मरीजों को भारत सरकार की निःक्षय पोषण योजना के तहत 1000 रुपये प्रति माह मिलना चाहिए।
🔹 सभी मरीजों को किसी व्यक्ति द्वारा गोद लिया जाना चाहिए।
ग्राम प्रधानों से अपील:
डीएम ने ग्राम प्रधानों से कुपोषण मिटाने का संकल्प लेने की अपील की, जिससे टीबी जैसी बीमारियों को रोका जा सके।
मुख्य विकास अधिकारी का बयान:
👉 गांव ही जिले की सबसे छोटी इकाई है, इसलिए गांवों को टीबी मुक्त करके पूरे जिले को टीबी मुक्त बनाया जाएगा।
👉 वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प पूरा करने के लिए यह अभियान जारी रहेगा।
सम्मानित किए गए अधिकारी और प्रधान:
इस अभियान में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. जयगोविंद, एसीएमओ डॉ. आदित्य वर्मा, डीपीआरओ लालजी दूबे, डीसीपीएम डॉ. आर.पी. सिंह, WHO के सलाहकार डॉ. दीपक चौधरी और सभी ग्राम प्रधान उपस्थित रहे।
➡️ डीएम ने अपील की कि 2025 में जब कार्यक्रम हो, तो पूरा गोंडा जिला टीबी मुक्त हो। 🏆
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