
गौरतलब है कि पहले जिले में पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत 10 अप्रैल 2025 से 30 जून 2025 या मानसून के आगमन तक के लिए बोरवेल खुदाई पर अस्थायी रोक लगाई गई थी। इसका मकसद भू-जल के अत्यधिक दोहन को रोकना था।
अब यह आदेश खत्म कर दिया गया है, लेकिन भू-जल उपयोग से जुड़े अन्य नियम पहले की तरह लागू रहेंगे। यानी बोरवेल खुदवाने की छूट तो मिलेगी, लेकिन कानूनी प्रावधानों का पालन करना जरूरी होगा।
