वैंकूवर:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कनाडा को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर घोषणा की कि अमेरिका तत्काल प्रभाव से कनाडा के साथ सभी व्यापार वार्ताएं बंद कर रहा है। इसके पीछे की वजह है कनाडा का डिजिटल सर्विस टैक्स (DST) — जो अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर सीधा असर डालने जा रहा है।
क्या है डिजिटल सर्विस टैक्स?
डिजिटल सर्विस टैक्स एक ऐसा कानून है जो कनाडा में ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं से जुड़कर कमाई करने वाले देशी-विदेशी बड़े कारोबारों पर 3% कर लगाता है। इसमें ऑनलाइन मार्केटप्लेस, विज्ञापन सेवाएं, सोशल मीडिया और यूज़र डेटा की बिक्री से कमाई को टैक्स के दायरे में लाया गया है।
यह टैक्स उन कंपनियों पर लागू होगा जिनका वार्षिक वैश्विक राजस्व €750 मिलियन या उससे अधिक है, और कनाडा से डिजिटल सेवाओं से CAD 20 मिलियन से अधिक की कमाई हो रही है।
सबसे अहम बात: यह टैक्स 1 जनवरी 2022 से लागू माना जाएगा और 30 जून 2025 से कंपनियों को भुगतान शुरू करना होगा।
कनाडा का पक्ष बनाम अमेरिका की नाराज़गी
कनाडा का तर्क है कि यदि विदेशी कंपनियाँ कनाडाई उपभोक्ताओं से बड़ी मात्रा में राजस्व कमा रही हैं, तो उन पर टैक्स लगाना न्यायोचित है।
कनाडा को इस टैक्स से हर साल लगभग 875 मिलियन डॉलर की आय की उम्मीद है।
वहीं, अमेरिका की Computer and Communications Industry Association (CCIA) का कहना है कि इससे $3 बिलियन तक का बोझ अमेरिकी कंपनियों पर पड़ेगा और 3,000 अमेरिकी नौकरियाँ खतरे में पड़ सकती हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
अमेरिका की यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) पहले भी कई देशों में लागू डिजिटल टैक्स को “अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभावपूर्ण” करार दे चुकी है।
2024 में, USTR ने कनाडा के खिलाफ USMCA (US-Mexico-Canada Agreement) के तहत विवाद समाधान प्रक्रिया शुरू की।
अमेरिका का आरोप है कि यह टैक्स कनाडा की USMCA के अंतर्गत क्रॉस-बॉर्डर व्यापार और निवेश संबंधी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करता है और अमेरिकी कंपनियों के साथ भेदभाव करता है।
कनाडा क्यों नहीं झुक रहा?
कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शांपेन ने स्पष्ट कहा है कि यह कानून संसद से पास हो चुका है और सरकार इसे लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।
कनाडा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल टैक्स के लिए कोई ठोस बहुपक्षीय समझौता अब तक नहीं हो पाया है, इसलिए उसे खुद यह कदम उठाना पड़ा।
कुछ आलोचकों का मानना है कि कनाडा का यह एकपक्षीय कदम अंतरराष्ट्रीय कर व्यवस्था की स्थिरता को खतरे में डाल सकता है, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा कनाडा पर पहले से ही स्टील, एल्यूमिनियम और ऑटो पर शुल्क लगाने के बाद, कनाडा अब आर्थिक दबाव का प्रतिकार कर रहा है।
डिजिटल सर्विस टैक्स को अब कनाडा का एक संभावित वार्तात्मक हथियार भी माना जा रहा है।
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