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नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आज 2 दिसंबर को आयोजित की गई। बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के वित्त मंत्रियों और अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य GST प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना था।
बैठक का उद्देश्य:
GST परिषद की इस बैठक का मुख्य उद्देश्य कर प्रणाली को सुदृढ़ बनाना और केंद्र एवं राज्यों के बीच वित्तीय तालमेल को बेहतर करना था। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में GST क्षतिपूर्ति उपकर और राज्यों के राजस्व संतुलन पर चर्चा की गई।
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री के सुझाव:
छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने बैठक में कहा कि GST क्षतिपूर्ति उपकर की अवधि को बढ़ाया जाए, ताकि राज्यों को होने वाले राजस्व घाटे की भरपाई हो सके। उन्होंने केंद्र से राज्यों को अधिक सहयोग देने की मांग की।
वित्त सचिव मुकेश बंसल ने सुझाव दिया कि GST प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए और राजस्व घाटे को दूर करने के लिए दीर्घकालिक समाधान निकाला जाए।
अन्य मुद्दों पर चर्चा:
- छोटे व्यापारियों के लिए: अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने और वार्षिक रिटर्न फाइलिंग को आसान करने पर जोर दिया गया।
- E-Way बिल और ITC: परिषद ने E-Way बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) प्रक्रिया को सरल करने पर भी विचार किया।
- डिजिटलाइजेशन: GST की निगरानी को डिजिटल माध्यम से मजबूत करने का सुझाव दिया गया।
- कर दरों में तर्कसंगता: विभिन्न राज्यों ने GST कर दरों को तर्कसंगत बनाने की मांग की।
GST क्षतिपूर्ति उपकर पर बहस:
बैठक में क्षतिपूर्ति उपकर को बढ़ाने और इसके विकल्प तलाशने पर राज्यों के बीच चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर केंद्र सरकार इस पर निर्णय लेगी।
इस बैठक में असम, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
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