नई दिल्ली | 23 अप्रैल 2025
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंच चुकी है। भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक संघर्ष में सहयोग देने की बात कही है। लेकिन इस बयान के साथ ही एक सवाल भी उठ खड़ा हुआ है – क्या बांग्लादेश अपने यहां अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर उतना ही संवेदनशील है?
क्या कहा बांग्लादेश ने?
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया, “हम भारत के जम्मू-कश्मीर में हुए इस क्रूर हमले की निंदा करते हैं। निर्दोष नागरिकों की मौत दुखद है। हम पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करते हैं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।”
इसके साथ ही, बांग्लादेश ने आतंकवाद के खिलाफ अपने “अडिग संकल्प” को दोहराया।
भारत में संवेदना, पर बांग्लादेश में चुप्पी?
हालांकि, बांग्लादेश का यह रुख विरोधाभासी नजर आता है। भारत में आतंकी घटना पर बयान देने वाला यह देश खुद हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को लेकर आलोचनाओं के घेरे में है।
हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश में धार्मिक स्थलों और समुदाय विशेष को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके बावजूद, इन घटनाओं पर न तो कोई स्पष्ट सरकारी प्रतिक्रिया आई है और न ही सख्त कार्रवाई देखी गई है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने पहले भी बांग्लादेश से हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय विदेश मंत्रालय इस मुद्दे को दो देशों के द्विपक्षीय वार्ता में प्रमुखता से उठा चुका है।
दुनियाभर से प्रतिक्रियाएं
पहलगाम में हुए हमले के बाद अमेरिका, रूस, यूएई, सिंगापुर और चीन समेत कई देशों ने इस घटना की निंदा की है। सभी ने भारत के प्रति एकजुटता जताते हुए आतंक के खिलाफ साझा प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
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