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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता और संगरिया के पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल का 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। सोमवार रात करीब 11:15 बजे उन्होंने शहर के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। कुछ दिन पहले ही उन्हें हीमोग्लोबिन की कमी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। ब्लड चढ़ाने के बाद उन्हें गंभीर निमोनिया हो गया था।
उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार को उनके पैतृक गांव 8 एलएनपी से निकलेगी।
किसानों और मजदूरों की आवाज
हेतराम बेनीवाल श्रीगंगानगर और सादुलशहर क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वे किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई के लिए जाने जाते थे। घड़साना किसान आंदोलन सहित कई जन आंदोलनों में उन्होंने नेतृत्व किया। अपने संघर्षों के कारण उन्हें करीब छह साल जेल में भी रहना पड़ा।
जनसंघर्षों के सच्चे नेता
उनका जीवन कृषि, पानी और स्थानीय मुद्दों के लिए समर्पित रहा। वे साधारण व्यक्तित्व के थे, लेकिन आंदोलनों में जोश भरने की अद्भुत क्षमता रखते थे। जब भी किसानों या आम लोगों का आंदोलन हुआ, वे हमेशा आगे खड़े नजर आए।
उनकी आवाज और नेतृत्व से आंदोलन को नई दिशा और ताकत मिलती थी।
राजनीतिक जीवन की झलक
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जन्म: 10 जून 1934, सुखचेन (पंजाब)
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शिक्षा: बीकानेर के डूंगर कॉलेज से एमए तक पढ़ाई
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1967 में संगरिया विधानसभा क्षेत्र से माकपा के टिकट पर चुनाव लड़ा
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1977 में टिकट नहीं मिलने के कारण चुनाव नहीं लड़ा
1971-72 में इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) के पहले चरण में जमीन आवंटन को लेकर चले आंदोलन में भी उनकी अहम भूमिका रही। उनके संघर्ष के कारण उस समय की सरकार को फैसला बदलना पड़ा।
2003 में भी उन्होंने किसानों के मुद्दों पर सरकार को झुकने पर मजबूर किया था।
हेतराम बेनीवाल के निधन से क्षेत्र में शोक की लहर है। कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने उन्हें जनसंघर्षों का सच्चा योद्धा बताते हुए श्रद्धांजलि दी है।
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