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फसल बीमा योजना में सिर्फ किसानों पर लागू होते हैं नियम, बीमा कंपनियों की मनमानी जारी

नागौर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नियम-कायदे केवल किसानों के लिए सख्ती से लागू होते हैं, लेकिन बीमा कंपनियां इन नियमों की खुलेआम अनदेखी करती हैं। किसानों को अगर तय समय पर प्रीमियम नहीं जमा करना हो या फसल खराबे की सूचना न दी जाए तो उन्हें क्लेम नहीं मिलता, लेकिन बीमा कंपनियां खुद पर लागू नियमों की पालना नहीं करतीं और फिर भी कोई कार्रवाई नहीं होती।

बीमा कंपनियों पर नहीं होती सख्ती

योजना के नियमों के अनुसार, फसल कटाई के बाद खेत में रखी फसल को नुकसान होने की स्थिति में बीमा कंपनी को सर्वे रिपोर्ट के 15 दिन के भीतर किसानों के खातों में क्लेम राशि ट्रांसफर करनी होती है और लाभार्थियों की सूची ग्राम पंचायत में चस्पा करनी होती है। लेकिन यह तभी होता है जब सरकार की तरफ से कंपनी को सब्सिडी (अनुदान) मिल जाए।

15 दिन की जगह 15 महीने भी बीत जाते हैं, क्लेम नहीं मिलता

2024 की खरीफ फसल में भारी बारिश और सूखे से फसलें खराब हो गई थीं। जिले के 3.54 लाख किसानों ने 3.21 लाख हेक्टेयर भूमि का बीमा करवाया था, जिसमें किसानों से करीब 27.55 करोड़ रुपए का प्रीमियम लिया गया। राज्य और केंद्र सरकार का प्रीमियम हिस्सा 98.60 करोड़ रुपए है। कुल मिलाकर 126.15 करोड़ रुपए की राशि बनती है, लेकिन 11 महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने अपना हिस्सा जमा नहीं किया है, इसलिए किसानों को अब तक बीमा क्लेम नहीं मिला।

जरूरी सूचियां भी नहीं लगाई जातीं

नियम के अनुसार, बीमा कंपनी को बीमा क्लेम मिलने वाले किसानों की सूची कृषि विभाग और ग्राम पंचायत में 15 दिन के भीतर चस्पा करनी होती है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी ही नहीं की जाती। न तो किसान को पॉलिसी बॉन्ड मिलता है, न ही ये सूचियां पंचायत में लगाई जाती हैं, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह गायब हो जाती है।

बीमा कंपनी का जवाब

बीमा कंपनी के जिला कॉर्डिनेटर अक्षय तिवाड़ी ने बताया कि “खरीफ 2024 का बीमा क्लेम अंतिम चरण में है। सरकार की ओर से मिलने वाला अनुदान अब तक नहीं मिला है। जैसे ही यह मिल जाएगा, पात्र किसानों के खातों में क्लेम राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।”

किसान परेशान, दोबारा बुआई शुरू

किसानों को पिछले सीजन का क्लेम अब तक नहीं मिला है, जबकि वे फिर से खरीफ की बुआई कर रहे हैं। ऐसे में बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। सरकार और बीमा कंपनियों की लापरवाही का सीधा असर खेतों में मेहनत करने वाले किसानों पर पड़ रहा है।

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