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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी स्वतंत्र और मजबूत आवाज में है, न कि किसी देश की जी-हुजूरी करने में।
अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि भारत ने हमेशा अपनी स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) से लेकर इंदिरा गांधी की मजबूत कूटनीति तक भारत ने कभी भी किसी बड़ी ताकत के दबाव में झुकने का काम नहीं किया।
2013 के देवयानी खोबरागड़े मामले का दिया उदाहरण
गहलोत ने 2013 के देवयानी खोबरागड़े मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने अमेरिका के राजनयिकों को दी जा रही कई सुविधाएं वापस लेकर कड़ा जवाब दिया था। इससे यह साफ हुआ कि भारत अपनी संप्रभुता और सम्मान से कभी समझौता नहीं करता।
अमेरिका की कार्रवाई पर उठाए सवाल
अशोक गहलोत ने हाल ही में हुए एक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में आयोजित MILAN 2026 अभ्यास के दौरान आए ईरान के जहाज IRIS Dena के साथ हुई घटना पर भारत की चुप्पी सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर चुप रहना हमारे ‘अतिथि देवो भव’ के संस्कार और सैन्य सम्मान के खिलाफ है।
भारत को मजबूत रुख अपनाने की जरूरत
गहलोत ने कहा कि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) माना जाता है। ऐसे में इस तरह की घटनाओं पर चुप रहना सही नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि भारत खुद को इस क्षेत्र का मजबूत और जिम्मेदार देश मानता है, तो उसे अपनी स्वतंत्र नीति और मेहमानों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
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