जहां एक ओर भारत अपनी सैन्य ताकत के ज़रिए पाकिस्तान को जवाब दे रहा है, वहीं तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन एक बिल्कुल अलग मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं—और वो है आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी। हैरानी की बात यह है कि भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच तुर्की ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया, यहां तक कि युद्धपोत भी कराची भेज दिया, लेकिन घरेलू मोर्चे पर एर्दोआन सरकार खुद संकट में घिरी हुई है।
कुत्तों ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें
तुर्की में हाल के महीनों में आवारा कुत्तों की वजह से कई जानलेवा घटनाएं हुई हैं। कोन्या में 2 साल की बच्ची की मौत, और अडाना व एर्ज़रूम में बुज़ुर्गों पर हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। सुरक्षा का माहौल इतना बिगड़ चुका है कि कई शहरों में बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है।
‘एनिमल प्रोटेक्शन लॉ 7527’ बना विवाद का कारण
इस संकट से निपटने के लिए एर्दोआन सरकार ने 2 अगस्त 2024 को एक सख्त कानून लागू किया।
इस कानून के अनुसार, स्थानीय प्रशासन को यह अधिकार मिल गया है कि वो सड़कों से आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर में रखें और जरूरत पड़ने पर उन्हें समाप्त भी कर दें। हालांकि सरकार ने “दया मृत्यु” जैसे शब्दों को कानूनी टेक्स्ट से हटाया है, लेकिन कार्यकर्ताओं का दावा है कि ज़मीनी स्तर पर कुत्तों की बेरहमी से हत्या हो रही है।
सियासत गरम, अदालत पहुंचा मामला
इस कानून ने तुर्की की राजनीति को दो धड़ों में बांट दिया है।
सरकार समर्थक दल इसे “जन सुरक्षा” की दिशा में उठाया गया ज़रूरी कदम बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल और प्रगतिशील संगठन इसे “कुत्तों की खुली हत्या का लाइसेंस” कह रहे हैं।
विपक्षी पार्टी CHP ने इस कानून की 17 में से 16 धाराओं को संवैधानिक अदालत में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
जनता की राय भी बंटी
एक ताजा Metropoll सर्वे के अनुसार:
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78% लोग चाहते हैं कि कुत्तों को पकड़ा जाए और शेल्टर में रखा जाए।
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17% लोग मानते हैं कि कुत्तों को सड़कों पर रहने देना चाहिए।
एनिमल राइट्स ग्रुप्स का कहना है कि सरकार को स्टरलाइजेशन, टीकाकरण और बेहतर शेल्टर पर ध्यान देना चाहिए, न कि सीधे उन्हें खत्म करने पर।
भारत-पाक तनाव के बीच एर्दोआन की घरेलू चुनौती
भारत इस समय पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों पर ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए सैन्य कार्रवाई कर रहा है। वहीं, तुर्की ने दिखावे के तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में कदम उठाए हैं, लेकिन अपने ही देश में एर्दोआन को आवारा कुत्तों जैसे संकट से निपटने के लिए जनता और न्यायपालिका दोनों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
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