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पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी एक बड़ा नाम हैं। वह शुरू से ही राजनीति में सक्रिय रही हैं। कम उम्र में ही उन्होंने ऐसे कदम उठाए, जिनसे उनकी पहचान पूरे देश में बनने लगी।
जेपी आंदोलन के दौरान सुर्खियों में आईं
ममता बनर्जी ने कोलकाता के जोगमाया देवी कॉलेज में पढ़ाई के दौरान छात्र राजनीति में हिस्सा लिया। उन्होंने कांग्रेस (आई) के छात्र संगठन “छात्र परिषद” की स्थापना की। उस समय देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं।
साल 1974 में समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी के खिलाफ ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन शुरू किया। यह आंदोलन पटना से शुरू होकर देशभर में फैल गया। इसी सिलसिले में जब जयप्रकाश नारायण कोलकाता विश्वविद्यालय आए, तो ममता बनर्जी ने उनका विरोध किया।
कहा जाता है कि विरोध के दौरान वह भीड़ को हटाते हुए जेपी की गाड़ी के बोनट पर चढ़ गईं और नारेबाजी करने लगीं। इस घटना की तस्वीरें अगले दिन अखबारों में छपीं और ममता बनर्जी चर्चा में आ गईं। यहीं से उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत होने लगी।
मोरारजी देसाई को दिखाए काले झंडे
जेपी आंदोलन के बाद 1977 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी की सरकार बनी। मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने।
जब वह कोलकाता आए, तो कांग्रेस ने उनके खिलाफ प्रदर्शन की योजना बनाई। इसकी जिम्मेदारी ममता बनर्जी को दी गई। कड़ी सुरक्षा के बावजूद ममता बदले हुए लिबास में प्रधानमंत्री की गाड़ी के सामने पहुंच गईं और काले झंडे दिखाए। उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इस घटना के बाद एक बार फिर वह चर्चा में आ गईं।
हमले में घायल हुईं
साल 1990 में ममता बनर्जी कांग्रेस की युवा नेता थीं। उस समय खाद्य तेल में मिलावट को लेकर राज्य में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। ममता भी कई रैलियों में शामिल हुईं।
हाजरा में एक रैली के दौरान उन पर हमला हुआ। एक कार्यकर्ता ने धारदार हथियार से उनके सिर पर वार किया। हमला इतना गंभीर था कि उनकी जान को खतरा हो गया था। इस घटना के बाद भी उन्होंने राजनीति नहीं छोड़ी।
ममता बनर्जी का राजनीतिक सफर छात्र जीवन से शुरू हुआ और विरोध-प्रदर्शन के जरिए उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। आज वह बंगाल की प्रमुख राजनीतिक नेता के रूप में जानी जाती हैं।
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