नई दिल्ली: केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के 11 साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर जहां बीजेपी अपनी उपलब्धियों को गिना रही है, वहीं कांग्रेस ने सरकार की नाकामियों को उजागर करने के लिए एक संगठित राष्ट्रीय अभियान छेड़ने की तैयारी कर ली है। पार्टी का दावा है कि वो तथ्यों और आंकड़ों के जरिए “झूठे विकास” की असलियत जनता के सामने लाएगी।
🔍 राज्य से लेकर जिला स्तर तक चलेगा अभियान
कांग्रेस के रिसर्च सेल को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वे राज्यवार आंकड़ों और नीतिगत विश्लेषणों के ज़रिए एक ऐसी रूपरेखा तैयार करें, जिससे मोदी सरकार की 11 साल की परफॉर्मेंस का मूल्यांकन हो सके। यह रिपोर्ट अब तैयार है, और इसके आधार पर सोशल मीडिया, पोस्टर, प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसभाओं के जरिए हमला बोला जाएगा।
📌 ये हैं कांग्रेस के 10 प्रमुख सवाल
कांग्रेस ने सरकार को घेरने के लिए 10 प्रमुख मुद्दों की सूची तैयार की है:
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आर्थिक मोर्चे पर विफलता: बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई पर सवाल।
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असफल विदेश नीति: पड़ोसी देशों के साथ तनाव और वैश्विक मंच पर गुम प्रभाव।
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जुमलों की राजनीति: 11 साल में किए गए कई वादे ज़मीनी हकीकत से दूर।
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सामाजिक समरसता पर हमला: ध्रुवीकरण की राजनीति से सामाजिक ताने-बाने को नुकसान।
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संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग: सीबीआई, ईडी जैसी एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल।
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चुनावी व्यवस्था में निष्पक्षता पर सवाल: ईवीएम, धनबल और प्रशासन के दुरुपयोग के आरोप।
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चंद पूंजीपतियों को फायदा: कथित ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ का आरोप।
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राष्ट्रीय सुरक्षा पर लचर जवाबदेही: आतंकी घटनाओं के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं।
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सेना के नाम पर सियासत: सैन्य अभियानों को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल।
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प्रधानमंत्री की चुप्पी: 11 वर्षों में एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस न देने को लेकर जवाबदेही का सवाल।
📈 बिहार से होगी शुरुआत, आगे हर राज्य में विस्तारित होगा अभियान
इस अभियान की शुरुआत चुनावी राज्य बिहार से की जा रही है। वहां कांग्रेस नेताओं ने “जुमलों की लिस्ट” जारी की है, जिसमें सरकार के वादों और उनके क्रियान्वयन की तुलना पेश की गई है।
💬 प्रवक्ताओं के तीखे आरोप
राजीव गौड़ा, कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर आत्ममुग्ध है, जबकि हकीकत ये है कि रोजगारविहीन वृद्धि हो रही है और कोविड के बाद की आर्थिक स्थिति बेहद चिंताजनक है।”
वहीं महिमा सिंह ने कहा, “सरकार अपने आंकड़ों में छल और भ्रम फैलाने का काम कर रही है। उदाहरण के तौर पर पीएम किसान योजना के तहत 3.7 लाख करोड़ रुपये वितरित करने का दावा किया गया, लेकिन सच्चाई ये है कि 2 करोड़ से अधिक किसानों को लाभार्थी सूची से बाहर कर दिया गया। नई सूची में 25 लाख नए नाम जोड़ने का दावा भी झूठा निकला क्योंकि वास्तव में सिर्फ 13 लाख किसानों को ही जोड़ा गया।”
🧭 अभियान का मकसद क्या है?
कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य केवल आलोचना नहीं, बल्कि जनता के सामने तथ्यों और निष्पक्ष विश्लेषण के जरिए सरकार की परफॉर्मेंस का आकलन रखना है। “11 साल – सवालों के नाम” की टैगलाइन के तहत यह अभियान जनता तक पहुंचाया जाएगा।
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