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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह रक्तदान से जुड़े नियमों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं करेगी। विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद सरकार ने कहा है कि कुछ श्रेणी के लोगों पर रक्तदान का प्रतिबंध जारी रहेगा, क्योंकि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में जरूरी माना गया है।
किन लोगों पर है रक्तदान का प्रतिबंध
सरकार के अनुसार भारत में इन तीन श्रेणी के लोगों को रक्तदान करने की अनुमति नहीं है:
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ट्रांसजेंडर व्यक्ति
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समलैंगिक पुरुष (गे पुरुष)
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यौन कर्मी (सेक्स वर्कर्स)
सरकार का कहना है कि मौजूदा नियमों के अनुसार इन लोगों को HIV/AIDS जैसी बीमारियों के उच्च जोखिम वाले समूह में रखा गया है।
मामला सुप्रीम कोर्ट में
सुप्रीम कोर्ट में उन याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है जिनमें राष्ट्रीय रक्त आधान परिषद (NBTC) और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) द्वारा जारी 2017 के दिशानिर्देशों को चुनौती दी गई है।
इन दिशानिर्देशों में कुछ समूहों को रक्तदान से बाहर रखा गया है।
सरकार का पक्ष
केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि विशेषज्ञों की राय के अनुसार यह प्रतिबंध सार्वजनिक स्वास्थ्य और रक्त की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
सरकार का कहना है कि कुछ समूहों में HIV, हेपेटाइटिस B और C संक्रमण का जोखिम ज्यादा पाया जाता है, इसलिए सावधानी के तौर पर यह नियम बनाए गए हैं।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह प्रतिबंध समानता और गरिमा के अधिकार के खिलाफ है। उनका तर्क है कि अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा जैसे कई देशों ने अपने पुराने नियमों में बदलाव कर दिए हैं और आधुनिक चिकित्सा तकनीक के कारण रक्त की जांच अब ज्यादा सुरक्षित हो गई है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और आगे के फैसले पर सबकी नजर बनी हुई है।
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