गुढ़ा बिश्नोइयान और खीचन में कंजर्वेशन प्लान
राजस्थान के जोधपुर जिले के पास स्थित गुढ़ा बिश्नोइयान को 2011 में कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया था, लेकिन पिछले 14 सालों में इसे विकसित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, खीचन में भी कुरजा (डेमोइसल क्रेन) के संरक्षण के लिए योजना बनी है। अब 2025-26 के बजट में इन दोनों क्षेत्रों को विकसित करने की उम्मीद जगी है।
गुढ़ा बिश्नोइयान कंजर्वेशन रिजर्व की स्थिति:
- 2011 में घोषित: गुढ़ा को 231 हेक्टेयर क्षेत्र में कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया था।
- 2016-17 में बना प्लान: वन विभाग ने 2016-17 में इसे विकसित करने का प्लान बनाया, लेकिन इसे मंजूरी नहीं मिली।
- 2024 में दोबारा प्रयास: अब 13 करोड़ रुपये का नया प्रोजेक्ट बनाकर सरकार के पास भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद काम शुरू होगा।
गुढ़ा में वन्यजीव और योजनाएं:
- हिरणों की संख्या: क्षेत्र में 215 से अधिक काले हिरण पाए जाते हैं।
- पर्यटन की संभावना: कंजर्वेशन के बाद पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है।
गुढ़ा में होने वाले कार्य:
- वॉच टावर का निर्माण (हिरणों को देखने के लिए)
- चारदीवारी का निर्माण
- वॉचिंग ट्रैक बनाना
- फेंसिंग के लिए तारों का घेरा
खीचन में कुरजा कंजर्वेशन रिजर्व:
- घोषणा: 2 साल पहले खीचन को कुरजा कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया था।
- क्षेत्रफल: लगभग 1200 बीघा जमीन पर इसका विकास होगा।
- बजट: इस बार 13 करोड़ रुपये का प्लान बनाकर भेजा गया है।
खीचन में होने वाले कार्य:
- कुरजाओं के लिए वॉचिंग टावर
- चारदीवारी का निर्माण
- फेंसिंग के लिए तारों का घेरा
- पक्षियों के लिए चुग्गाघर
- वॉचिंग ट्रैक
महत्वपूर्ण तिथियां:
- 2011: गुढ़ा कंजर्वेशन रिजर्व घोषित
- 2016-17: पहला प्लान बना, लेकिन मंजूरी नहीं मिली
- 2024: वन विभाग के मैनेजमेंट प्लान में फिर शामिल किया गया
- 2025-26: बजट में विकास कार्यों की उम्मीद
इन प्रयासों से राजस्थान के वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई दिशा मिलने की संभावना है।
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