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कटनी (मध्य प्रदेश)।
विश्व धरोहर दिवस पर जब देशभर में पुरानी विरासतों को संजोने की बातें हो रही हैं, वहीं कटनी जिले की धरोहरें आज भी ताले में बंद पड़ी हैं। खास बात यह है कि खुदाई में मिलीं कल्चुरीकाल की प्राचीन मूर्तियां एक कमरे में बंद हैं और लोग उन्हें देख भी नहीं पा रहे।
संग्रहालय की योजना कागजों में दब गई
पुरातत्व विभाग ने बिलहरी में एक संग्रहालय खोलने की योजना बनाई थी और इसके लिए जिला प्रशासन से जमीन भी मांगी गई थी, लेकिन यह योजना अभी तक फाइलों में ही अटकी हुई है।
कीमती मूर्तियां ताले में बंद
पुरानी खुदाई में नायाब मूर्तियां और शिल्प प्राप्त हुए थे, जिन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने एक कमरे में सुरक्षित रखा, पर संग्रहालय में प्रदर्शित करने की कोई पहल नहीं हुई।
पर्यटन और रोजगार की बड़ी संभावना
कटनी में ऐसी कई ऐतिहासिक जगहें हैं, जिन्हें टूरिज्म सर्किट के रूप में विकसित किया जाए तो यह जिला देश के पर्यटन नक्शे पर उभर सकता है और युवाओं को रोजगार भी मिल सकता है।
कटनी की धरोहरें देशभर के म्यूजियम में
कटनी में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियां जबलपुर, रायपुर, नागपुर, कलकत्ता और ग्वालियर के संग्रहालयों की शोभा बढ़ा रही हैं, लेकिन जिले में कोई बड़ा संग्रहालय नहीं बन पाया।
सम्राट अशोक के शिलालेख और कारीतलाई की विरासत
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रूपनाथ धाम में सम्राट अशोक के शिलालेख हैं, जो दुनियाभर के सिर्फ 40 स्थानों में पाए जाते हैं।
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कारीतलाई में विष्णु-वराह मंदिर, पुरानी पाठशाला, बावली, और कई मूर्तियां बिखरी पड़ी हैं।
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शिलालेखों को बाहर के संग्रहालयों में रखा गया है, जबकि स्थानीय लोग चाहते हैं कि उन्हें यहीं सहेजा जाए।
विजयराघवगढ़ का किला भी उपेक्षित
1857 की क्रांति का गवाह रहा विजयराघवगढ़ किला आज जीर्ण हालत में है। इसे होटल हेरिटेज में बदलने की योजना चल रही है, जबकि यह स्वतंत्रता संग्राम की अहम धरोहर है।
अन्य विरासतें जो खास पहचान दिला सकती हैं:
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झिंझरी शैलवन: 7 किमी दूर पाषाण युग की दुर्लभ कला।
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रूपनाथ धाम: अशोक कालीन शिलालेख वाला स्थान।
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तिलक स्कूल: जहां 1933 में महात्मा गांधी ठहरे थे।
एक्सपर्ट्स की राय:
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शिवाकांत बाजपेयी (अधीक्षण, पुरातत्वविद): बिलहरी में संग्रहालय के लिए 300 मीटर क्षेत्र सुरक्षित है, जमीन की प्रक्रिया जारी है।
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राजेंद्र ठाकुर (सह संयोजक, इंटेक कटनी चेप्टर): कटनी जिले में कारीतलाई, बड़गांव, तिगवां, बिलहरी जैसे स्थानों पर संग्रहालय बनने चाहिए, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता से ये योजनाएं ठप हैं।
निष्कर्ष:
कटनी की ऐतिहासिक धरोहरें संरक्षण और प्रमोट करने की बाट जोह रही हैं। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह अमूल्य विरासत भूलती जा रही कहानी बनकर रह जाएगी।
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