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राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में मंडावा से कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए। राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विपक्ष के विधायकों से मिलने और फोन उठाने के दावे करते हैं, लेकिन उनका अनुभव अलग रहा।
“मुख्यमंत्री मुझे पहचान नहीं पाए”
रीटा चौधरी ने सदन में बताया कि जब भजनलाल शर्मा नए मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने बजट के मुद्दे पर उनसे मिलने के लिए फोन किया। उन्हें दोपहर 1 बजे सीएमओ बुलाया गया।
उन्होंने कहा कि जब वे वहां पहुंचीं तो मुख्यमंत्री ने उनसे पूछा, “आप कहाँ से विधायक हो?”
रीटा चौधरी के मुताबिक, यह बात उन्हें हैरान कर गई क्योंकि समय खुद मुख्यमंत्री ने दिया था।
“विपक्ष को नहीं मिलती प्राथमिकता”
उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमओ में पहले आरएसएस से जुड़े लोगों और सत्ता पक्ष के विधायकों को बुलाया गया, जबकि उन्हें अंत में समय दिया गया।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले विपक्ष के विधायकों को प्राथमिकता दी जाती थी।
मंत्री और अधिकारियों पर भी सवाल
रीटा चौधरी ने अपने क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर भी नाराजगी जताई।
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उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री फोन नहीं उठाते।
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मंडावा में हवेलियों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं।
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प्रशासन जनता की शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निजी काम के लिए नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री और मंत्रियों से मिलना चाहती थीं।
कौन हैं रीटा चौधरी?
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वे राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय रामनारायण चौधरी की पुत्री हैं।
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मंडावा सीट से तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं।
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2008 में पहली बार जीतीं, फिर 2019 के उपचुनाव और 2023 में भी जीत हासिल की।
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शेखावाटी क्षेत्र में जाट समुदाय के बीच उनका मजबूत जनाधार है।
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वे किसानों, महिलाओं की शिक्षा और ऐतिहासिक हवेलियों के संरक्षण जैसे मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं।
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विधानसभा में वे राजस्व, शिक्षा और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए जानी जाती हैं।
इस तरह सदन में दिए गए उनके बयान से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
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