अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड मेडिकल स्कूल एक चौंकाने वाले मामले को लेकर सुर्खियों में है, जहां स्कूल के शवगृह का प्रबंधन देख चुके एक पूर्व कर्मचारी ने मानव अंगों की अवैध बिक्री की बात स्वीकार की है।
57 वर्षीय सेड्रिक लॉज, जो हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मोर्चरी मैनेजर रह चुके हैं, ने यह स्वीकार किया है कि उन्होंने 2018 से 2020 के बीच डोनर शवों से सिर, स्किन, हाथ, चेहरा और मस्तिष्क जैसे अंग चुराए और उन्हें ब्लैक मार्केट में बेचा।
मेडिकल डोनेशन का गलत इस्तेमाल
ये अंग उन शवों से लिए गए थे जो लोगों ने मेडिकल रिसर्च और शिक्षा के लिए दान किए थे। लॉज पर आरोप है कि उन्होंने शवों के शैक्षणिक उपयोग के बाद भी, डोनर एग्रीमेंट का उल्लंघन करते हुए, उन्हें अंतिम संस्कार या दफनाने से पहले उनके अंग निकाल लिए।
इन अंगों की तस्करी इंटरस्टेट ट्रांसपोर्ट यानी राज्यों के बीच माल ढुलाई के जरिए की गई।
घर में बना रखा था तस्करी का अड्डा
अभियोजन पक्ष के अनुसार, लॉज चोरी किए गए अंगों को बोस्टन स्थित शवगृह से निकालकर न्यू हैम्पशायर के अपने घर गॉफ्सटाउन ले जाते थे। वहीं, वह और उनकी पत्नी डेनिस लॉज मिलकर इन अंगों की बिक्री का नेटवर्क चलाते थे।
कभी ये अंग कोरियर के ज़रिए खरीदारों तक पहुंचाए जाते, तो कभी दोनों खुद जाकर सौदे करते थे। बताया जा रहा है कि ये नेटवर्क मैसाचुसेट्स, न्यू हैम्पशायर और पेंसिलवेनिया जैसे राज्यों में फैला हुआ था।
फैसला अब अदालत के हाथ में
सेड्रिक लॉज ने 21 मई 2025 को पेंसिलवेनिया की फेडरल कोर्ट में अपना जुर्म कबूल कर लिया। अब उन पर फेडरल कानून के तहत अधिकतम 10 साल की जेल, जुर्माना, और सुपरवाइज्ड रिलीज की सजा दी जा सकती है।
उनकी पत्नी डेनिस ने भी पिछले साल अपराध में अपनी भूमिका स्वीकार की थी और फिलहाल वह सजा के ऐलान की प्रतीक्षा कर रही हैं।
नैतिकता और भरोसे पर गहरा सवाल
ये मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस सामाजिक और नैतिक भरोसे पर गहरी चोट है, जिसके तहत लोग अपने शव मेडिकल रिसर्च के लिए दान करते हैं। हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के भीतर से ऐसी खबरें सामने आना, दुनिया भर के मेडिकल एथिक्स और रिसर्च ट्रस्ट पर भी सवाल खड़ा करता है।
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