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उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा 27,764 प्राइमरी और जूनियर स्कूलों को बंद करने के फैसले की खबरों पर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और बसपा प्रमुख मायावती ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे गरीबों और वंचित तबके के बच्चों के लिए अनुचित बताया है।
प्रियंका गांधी का बयान
प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भाजपा सरकार का यह निर्णय गरीब, दलित, पिछड़े और वंचित बच्चों के खिलाफ है। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून लागू किया था ताकि हर एक किलोमीटर की दूरी पर एक प्राइमरी स्कूल हो सके और सभी तबकों के बच्चों को शिक्षा सुलभ हो। उनका कहना है कि भाजपा सरकार की नीतियां कल्याणकारी न होकर मुनाफा कमाने पर केंद्रित हैं और गरीब तबके के बच्चों की शिक्षा तक पहुंच को सीमित करने का प्रयास कर रही हैं।
मायावती का विरोध
बसपा प्रमुख मायावती ने भी योगी सरकार के फैसले को अनुचित बताया है। उन्होंने कहा कि 50 से कम छात्रों वाले स्कूलों में सुधार की जगह उन्हें बंद करना गरीब बच्चों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से गरीबों के बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। उन्होंने ओडिशा सरकार द्वारा भी कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद करने के निर्णय की आलोचना की।
बेसिक शिक्षा महानिदेशक का खंडन
बेसिक शिक्षा विभाग की महानिदेशक कंचन वर्मा ने कहा कि स्कूल बंद करने की खबरें झूठी और भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्कूल को बंद करने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों की सुविधा के लिए लगातार प्रयासरत है और विद्यालयों में सुधार के लिए योजनाओं पर काम कर रही है।
विपक्षी दलों का विरोध
कांग्रेस और बसपा इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर हैं और माना जा रहा है कि यह मुद्दा यूपी उपचुनाव 2024 में भी उठाया जा सकता है।
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