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बरेली और रामपुर में रसूखदारों ने वन विभाग की भूमि पर कब्जा किया, कैग रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई

बरेली और रामपुर के कुछ रसूखदारों ने वन विभाग की संरक्षित भूमि पर अवैध रूप से रास्ते बना लिए हैं। इन रसूखदारों ने वन विभाग से बिना अनुमति के अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों तक जाने के लिए इन रास्तों का निर्माण किया। इसके बावजूद वन विभाग ने कोई आपत्ति नहीं जताई और न ही कोई कानूनी कार्रवाई की। लेकिन कैग (CAG) की रिपोर्ट के बाद अब इस मामले में हलचल मच गई है।

इन उद्यमियों ने नियमों का उल्लंघन किया

बरेली में कुछ प्रमुख लोग जैसे प्रेम प्रकाश गुप्ता, सचिन कुमार, उमेश नैमानी, रमन, अनिल, रामेश्वर दयाल कठेरिया, महताब सिद्दीकी और भगवान सिंह बिष्ट पर आरोप हैं कि उन्होंने अवैध रूप से वन भूमि का उपयोग किया। रामपुर जिले में भी राशिद खान, शफीक, अरमान, पप्पू, जितेंद्र सिंह, अजय सैनी, शजीर और अनिल कुमार जैन ने इस तरह के आरोपों का सामना किया है।

पौधरोपण में गड़बड़ियां

कैग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लखीमपुर और बरेली में पौधरोपण के दौरान गड़बड़ियां की गईं। उदाहरण के लिए, उत्तर खीरी में 20 हेक्टेयर में पौधरोपण होना था, लेकिन 473 हेक्टेयर में पौधे लगाए गए। इसी तरह, बरेली में बिना चिह्नित क्षेत्र में पौधरोपण किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।

वन विभाग के जवाब पर सवाल

वन विभाग ने कहा था कि उद्यमियों ने केवल सार्वजनिक रास्तों का उपयोग किया है, लेकिन कैग ने इसे भारतीय वन अधिनियम 1927 का उल्लंघन बताते हुए खारिज कर दिया।

नर्सरी में अतिरिक्त पौधे उगाने का मामला

बरेली में 2020-21 से 2021-22 तक नर्सरियों में अतिरिक्त पौधों का उगाया जाना भी सामने आया। नर्सरी की क्षमता 35.2 लाख पौधों की थी, लेकिन 45.5 लाख पौधे उगाए गए। वन विभाग ने इसे अतिरिक्त पौधरोपण का कारण बताया, लेकिन लेखा परीक्षा ने इसे नियमों के खिलाफ बताया।

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