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पत्रिका बुक फेयर: हिंदी गजल में हो हिंदुस्तान की झलक – गोपाल गर्ग

जयपुर। जवाहर कला केंद्र में चल रहे पत्रिका बुक फेयर 2025 के छठे दिन ‘हिंदी गजल लेखन और इसके विविध पहलू’ विषय पर चर्चा हुई। इस सत्र में हिंदी गजल लेखक गोपाल गर्ग ने कहा कि सिर्फ हिंदी शब्दों के इस्तेमाल से कोई गजल हिंदी गजल नहीं बनती। असली हिंदी गजल वह होती है, जिसमें देश का इतिहास, संस्कृति और परंपराओं की झलक दिखे

दुष्यंत कुमार का हिंदी गजल में बड़ा योगदान

गर्ग ने बताया कि हिंदी गजल को पहचान दिलाने में दुष्यंत कुमार का अहम योगदान रहा है। उनकी गजलें साहित्य प्रेमियों को बहुत पसंद आईं और इसके बाद हिंदी गजल का अलग स्थान बना।

गजल लेखन के नियम

उन्होंने गजल लिखने की प्रक्रिया समझाते हुए बताया कि इसमें काफिया, रदीफ, मतला, मक्ता और मिसरा का खास महत्व होता है। हर गजल एक निश्चित विधान के अनुसार ही लिखी जानी चाहिए।

आजकल गजल के नाम पर कुछ भी परोसा जा रहा

गर्ग ने चिंता जताई कि आजकल गजल के नाम पर कुछ भी लिखा जा रहा है, जो इसके मूल स्वरूप से भिन्न है। गजल लेखन के नियमों का पालन करना जरूरी है, ताकि इसकी गुणवत्ता बनी रहे।

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